नई दिल्ली। भारत के बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर (बीएफएसआई) में वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में कुल 65 डील्स हुई हैं और इन डील्स की वैल्यू तिमाही आधार पर 58 प्रतिशत बढ़कर 3.2 अरब डॉलर हो गई है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी की रिपोर्ट के अनुसार, वैल्यू में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से एक बड़े ट्रांजैक्शन की वजह से हुई। इस तिमाही के दौरान, इस सेक्टर की कुल डील वॉल्यूम में हिस्सेदारी 11 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू में 8 प्रतिशत रही।
2026 की अप्रैल-जून अवधि में एमएंडए डील्स की संख्या 24 और वैल्यू 1.5 अरब डॉलर पर पहुंच गई। तिमाही आधार पर एमएंडए डील्स की संख्या में 50 प्रतिशत और वैल्यू में पांच गुना का इजाफा देखने को मिला।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक मार्केट की गतिविधियों को छोड़कर, बीएफएसआई सेक्टर ने 2.8 अरब मूल्य के 62 एमएंडए और प्राइवेट इक्विटी या वेंचर कैपिटल ट्रांजैक्शन दर्ज किए, जबकि वैश्विक अस्थिता के चलते अनिश्चितताएं बनी हुई थीं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर, फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर, विवेक अय्यर ने कहा, "निवेश के लिए सतर्क माहौल के बावजूद, कुछ रणनीतिक ट्रांजैक्शन की वजह से बीएफएसआई सेक्टर में 2026 की दूसरी तिमाही में धीरे-धीरे सुधार देखा गया। निवेशकों ने स्केलेबल, प्लेटफॉर्म-आधारित और रेगुलेटेड व्यवसायों को प्राथमिकता देना जारी रखा, जबकि पूंजी लगाने का काम सोच-समझकर किया गया।"
उन्होंने आगे कहा, "जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर आर्थिक हालात स्थिर होंगे और कैपिटल मार्केट का दायरा बढ़ेगा, भारत का फाइनेंशियल सर्विसेज इकोसिस्टम लंबे समय तक लगातार रणनीतिक और वित्तीय निवेश आकर्षित करने की अच्छी स्थिति में बना रहेगा।"
समीक्षा अवधि में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में 1.3 अरब डॉलर मूल्य के 38 सौदे शामिल थे, जबकि पब्लिक मार्केट की गतिविधियां धीमी रहीं। इसमें एक इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) से 97 मिलियन डॉलर और दो क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट से 310 मिलियन डॉलर जुटाए गए।
फिनटेक सबसे सक्रिय सेगमेंट बना रहा, जिसमें 1.4 अरब डॉलर मूल्य के 31 सौदे हुए, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज और एसेट मैनेजमेंट में 690 मिलियन डॉलर के 16 सौदे दर्ज किए गए, और इनकी वैल्यू तिमाही आधार पर लगभग तीन गुना हो गई।
पीई/वीसी निवेश गतिविधियां मुख्य रूप से छोटे ट्रांजैक्शन की ओर झुकी हुई थीं, हालांकि स्केलेबल फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।




