भोपाल। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट (221) से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने राजनीति में एक अनोखी और अनुकरणीय मिसाल पेश की है। विधायक डोडियार ने नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) भोपाल में एलएलएम (LLM) कोर्स में नियमित छात्र के रूप में दाखिला लिया है। उच्च शिक्षा की इस अवधि के दौरान उन्होंने स्वेच्छा से अपना विधायक वेतन और भत्ते न लेने का फैसला किया है। इस संबंध में उन्होंने 13 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है।
20 जुलाई से शुरू हो रही है पढ़ाई
विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में विधायक कमलेश्वर डोडियार ने बताया कि वे 20 जुलाई 2026 से नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल में एक वर्षीय LLM पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कोर्स में नियमित अध्ययन और शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे। नियमित कक्षाओं और परीक्षाओं के चलते उन्होंने स्वेच्छा से 20 जुलाई 2026 से 15 मई 2027 (करीब 10 महीने) तक के लिए अपना विधायक वेतन और भत्ते स्थगित करने का विनम्र अनुरोध किया है। डोडियार ने पत्र में स्पष्ट किया है: "मैं यह घोषणा करता हूँ कि यह निर्णय मैंने बिना किसी दबाव के अपनी स्वेच्छा से लिया है। भविष्य में यदि वेतन एवं भत्ते पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता होगी, तो इस संबंध में पृथक आवेदन प्रस्तुत करूँगा।"
पढ़ाई के साथ-साथ निभाएंगे जनता के प्रति अपने कर्तव्य
अक्सर देखा जाता है कि जनप्रतिनिधि व्यस्तताओं के कारण क्षेत्र की जनता से दूर हो जाते हैं, लेकिन डोडियार ने आश्वस्त किया है कि पढ़ाई के साथ-साथ उनके राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्यों में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने पत्र में लिखा है कि अकादमिक सत्र 2026-27 के दौरान वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया और यूनिवर्सिटी के नियमों का पालन करते हुए पढ़ाई करेंगे।
इसके साथ ही, वे अपनी प्राथमिकताओं को संतुलित करते हुए:
- विधानसभा सत्रों में उपस्थित होकर जनता के हितों की आवाज़ उठाएंगे।
- विधानसभा क्षेत्र में शासकीय कार्यक्रमों, गतिविधियों और समय-समय पर जन समस्याओं की सुनवाई जारी रखेंगे।
- शासन-प्रशासन से नियमित संपर्क बनाए रखेंगे।
अपने खर्च से करेंगे क्षेत्र का दौरा
विधायक ने पत्र के दूसरे भाग में स्पष्ट किया कि करीब 10 महीने का वेतन-भत्ता छोड़ने के बाद भी वे जनता की सेवा में पीछे नहीं हटेंगे। वे विधानसभा क्षेत्र में दौरे, कार्यक्रमों और जन सुनवाई जैसी गतिविधियों में अपनी उपस्थिति स्वयं के खर्चे से सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से उनके इस आवेदन पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। राजनीति के इस दौर में, जहाँ सुख-सुविधाओं और भत्तों के लिए खींचतान मची रहती है, वहीं एक युवा आदिवासी विधायक का शिक्षा के प्रति यह समर्पण और नैतिकता की यह मिसाल सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोर रही है।




