दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। इस बीच, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे ग्वालियर-चंबल अंचल के इस रण में यूपी की दो प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों— बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा)— ने बिल्कुल अलग-अलग रणनीतिक रास्ते चुने हैं। जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस उपचुनाव से पूरी तरह दूरी बना ली है, वहीं अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को खुला समर्थन देकर 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के प्रति एकजुटता दिखाई है।
बसपा सुप्रीमो मायावती का फैसला— उपचुनाव छोड़ 2028 के मुख्य रण पर फोकस
दतिया उपचुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी के खेमे से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी को इस उपचुनाव की आपाधापी से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने मध्य प्रदेश की पूरी राज्य इकाई को तात्कालिक उपचुनावों में ऊर्जा लगाने के बजाय साल 2028 में होने वाले आगामी मुख्य विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस रणनीतिक फैसले के तहत बसपा के मध्य प्रदेश प्रभारी राजाराम, प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर कैडर मैनेजमेंट (Cadder Management) को मजबूत करने में जुट गए हैं। पार्टी का मानना है कि उपचुनावों में पूरी ताकत झोंकने के बजाय इस समय का उपयोग संगठन की कमियों को दूर करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और बूथ स्तर पर अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए ताकि 2028 में पार्टी किंगमेकर की भूमिका में उभर सके।
सपा निभाएगी 'इंडिया' गठबंधन धर्म, कांग्रेस प्रत्याशी को बिना शर्त समर्थन
बसपा के विपरीत, उत्तर प्रदेश की ही दूसरी बड़ी ताकत समाजवादी पार्टी (सपा) दतिया उपचुनाव के रण में पूरी तरह सक्रिय है, लेकिन एक अलग भूमिका में। इस सीमावर्ती अंचल में सपा ने अपना स्वतंत्र प्रत्याशी उतारने के बजाय राष्ट्रीय स्तर के 'इंडिया गठबंधन' (INDIA Alliance) के धर्म का पूरी ईमानदारी से पालन करने का निर्णय लिया है। समाजवादी पार्टी के मध्य प्रदेश नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे दतिया में कोई त्रिकोणीय मुकाबला पैदा कर विपक्षी वोटों का बिखराव नहीं होने देंगे। सपा इस सीट पर कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार घनश्याम सिंह का बिना शर्त खुला समर्थन कर रही है। सपा के इस कदम से कांग्रेस को दतिया के उन क्षेत्रों में बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है जहां उत्तर प्रदेश की राजनीति और यादव मतदाताओं का खासा प्रभाव माना जाता है।
बसपा के मैदान में न होने से बदलेगा दतिया का समीकरण
बसपा द्वारा उम्मीदवार न उतारने और सपा द्वारा कांग्रेस को समर्थन देने के इस घटनाक्रम ने दतिया उपचुनाव के जातीय और राजनैतिक समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है:
- दलित वोटों पर नजर: दतिया सीट पर पारंपरिक रूप से बहुजन समाज पार्टी का एक निश्चित और मजबूत वोट बैंक रहा है। बसपा के मैदान में न होने से अब यह देखना अहम होगा कि दलित और वंचित वर्ग का मतदाता किस ओर रुख करता है। कांग्रेस जहां इसे अपने पाले में लाने की कोशिश करेगी, वहीं आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव भी इस खाली जमीन को कब्जाने की पूरी कोशिश में हैं।
- गठबंधन की ताकत: सपा और कांग्रेस का यह जमीनी समन्वय भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है, क्योंकि अब विपक्ष का बिखराव काफी हद तक रुक गया है।
आगामी 30 जुलाई को होने वाले मतदान में इन रणनीतिक फैसलों का क्या असर होता है, यह दतिया की जनता तय करेगी।


