नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में अंबेडकरनगर जिले की सियासत में समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना दबदबा कायम रखा। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि एक सीट पर भाजपा ने कब्जा किया। अकबरपुर, आलापुर, जलालपुर और टांडा में सपा प्रत्याशियों ने प्रतिद्वंद्वियों को शिकस्त दी। वहीं, कटेहरी सीट पर भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी ने जीत हासिल की। चुनाव परिणामों ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को काफी हद तक बदल दिया।
अंबेडकरनगर जिले की सभी पांच सीटों पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। कहीं सपा प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की तो कहीं भाजपा और बसपा के उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य, कानून-व्यवस्था, रोजगार और किसानों से जुड़े सवाल चुनाव में अहम रहे। आइए जानते हैं अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों का चुनावी परिणाम।
अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राम अचल राजभर ने जीत हासिल की। इस सीट पर उनकी साख दांव पर लगी थी। उन्होंने भाजपा के धर्मराज निषाद, बसपा के चंद्रप्रकाश वर्मा और कांग्रेस की प्रियंका जायसवाल को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की। अकबरपुर विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां दलित मतदाताओं की अच्छी संख्या होने के साथ ही ब्राह्मण, कुर्मी, राजभर और निषाद समुदाय के मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि इस सीट पर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर रहती है।
अकबरपुर का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1993 में बहुजन समाज पार्टी ने यहां पहली बार जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में राम अचल राजभर बसपा के प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए थे। इस क्षेत्र की राजनीति में बसपा का प्रभाव भी है। अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में भी बसपा का मजबूत जनाधार रहा है। यहां से मायावती भी सांसद चुनी गई थीं।
विधानसभा चुनाव में राम अचल राजभर की जीत ने एक बार फिर इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया। सपा प्रत्याशी ने विभिन्न जातीय समूहों का समर्थन हासिल कर अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया।
अंबेडकरनगर जिले की आलापुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी त्रिभुवन दत्त ने जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा की ओर से त्रिवेणी राम, कांग्रेस से सत्यमवदा पासवान और बसपा से केशरा देवी गौतम चुनाव मैदान में थीं। मुकाबले में त्रिभुवन दत्त ने बाजी मारते हुए सपा के खाते में एक और सीट जोड़ दी।
आलापुर विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां दलित और यादव मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के मतदाता भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। उस समय प्रदेश में भाजपा के पक्ष में बनी लहर का फायदा पार्टी प्रत्याशी अनीता कमल को मिला था। उन्होंने समाजवादी पार्टी की संगीता को 12,513 वोटों से हराकर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की थी।
हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं। समाजवादी पार्टी ने त्रिभुवन दत्त को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत हासिल कर भाजपा से यह सीट छीन ली। इस परिणाम को जिले में सपा के मजबूत प्रदर्शन के रूप में देखा गया।
जलालपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राकेश पांडेय ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार राजेश सिंह को 13,630 मतों के अंतर से पराजित किया। इस सीट पर सपा और बसपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला, जबकि भाजपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे।
चुनाव परिणाम के मुताबिक, राकेश पांडेय को कुल 93,668 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के राजेश सिंह को 80,038 मत प्राप्त हुए। दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर 13,630 वोट रहा। भाजपा के प्रत्याशी सुभाष चंद्र राय 71,236 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी को अपेक्षाकृत कम मत मिले।
जलालपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से एक महत्वपूर्ण सीट है। यहां चुनावी मुकाबले को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक दलों में खासा उत्साह था। इस सीट पर स्थानीय विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं और जातीय समीकरण चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहे।
कटेहरी विधानसभा सीट पर मुकाबला जिले की अन्य सीटों से अलग और बेहद दिलचस्प रहा। यहां भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी अवधेश कुमार ने जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा को हराया। इस सीट पर बसपा की ओर से प्रतीक पांडेय और कांग्रेस की ओर से निशात फातिमा चुनाव मैदान में थीं। कटेहरी सीट पर चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।
कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव हमेशा से चुनावी परिणामों को प्रभावित करते रहे हैं। इस बार भी मतदाताओं के रुख ने सीट के मुकाबले को काफी रोचक बना दिया।
अंबेडकरनगर जिले की टांडा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा के कपिल देव को 32,097 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस सीट पर बसपा की शबाना खातून और कांग्रेस के प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में थे। राममूर्ति वर्मा को कुल 95,263 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी कपिल देव को 63,166 मत प्राप्त हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर 32,097 वोट रहा। बसपा की शबाना खातून 45,222 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं, एआईएमआईएम की प्रेमलता को 7,442 वोट मिले। स्थानीय विकास, रोजगार, सड़क, बिजली, किसानों की समस्याएं और जातीय समीकरण इस सीट पर चुनावी चर्चा के प्रमुख विषय रहे।














