संयुक्त राष्ट्र। नेपाल त्रासदी पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से दुख जताया गया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नेपाल और तिब्बत में अचानक आई बाढ़ से हुई जानमाल की हानि पर दुख जताया है। महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, सरकार के नेतृत्व में किए जा रहे राहत कार्यों और तत्काल मदद में सहयोग कर रहा है।स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के तीन जिलों में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई है और सुरक्षाकर्मियों व पर्यटकों सहित सैकड़ों लोग लापता हैं। प्रवक्ता ने कहा, "महासचिव नेपाल और चीन में आई भीषण बाढ़ से दुखी हैं, जिसमें कई लोगों की जान चली गई, कई लोग लापता हो गए और बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।"
गुटेरेस ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने प्रभावित सभी लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
दुजारिक की ओर से कहा गया, "संयुक्त राष्ट्र नेपाल में सरकार के नेतृत्व वाली प्रतिक्रिया का समर्थन कर रहा है। आपदा के पैमाने का आकलन करना और तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोशिश की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें और मानवीय साझेदार बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए जरूरी सामान और कर्मियों को जुटा रहे हैं।"
प्रवक्ता ने आगे कहा, "महासचिव लोगों की जान बचाने के लिए काम कर रहे आपातकालीन कर्मियों की सराहना करते हैं और आगे भी सहायता प्रदान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की तत्परता को दोहराते हैं।"
'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, यह बाढ़ उस वक्त आई जब एक हिमस्खलन (एवलांच) ने भोटेकोशी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे' के बहाव को रोक दिया और सबसे पहले रसुवागढ़ी में नेपाल-चीन सीमा के पास 'तिमुरे' इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि उस इलाके में बारिश की कोई सूचना नहीं थी, इसलिए लोगों को आपदा की कोई चेतावनी नहीं मिली और जब बाढ़ आई तो वे अपने रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे।
इस बीच, आपदा के कारण 391 पर्यटक और 44 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं। नेपाली सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि नेपाल सेना के 44 जवान, विभिन्न पुलिस चौकियों पर तैनात 28 पुलिसकर्मी, और प्रभावित इलाकों में काम कर रहे सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के 13 जवान संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा, नौ जलविद्युत परियोजनाएं और कई कमर्शियल बैंक, कम से कम 19 मोटर-योग्य पुल, और दर्जनों सार्वजनिक व निजी संपत्तियां बह गई हैं।




