नई दिल्ली। महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और लोकतंत्र बचाने के लिए श्रृंखलाबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। मुंबई में तिरंगा संविधान पदयात्रा की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सत्याग्रह की तर्ज पर वे कॉर्पोरेशन ऑफिस से मंत्रालय तक पदयात्रा करेंगे। वहीं, पुलिस द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र का हवाला देकर रोके जाने पर उन्होंने कहा कि आज छुट्टी का दिन है, किसी को तकलीफ नहीं होगी लेकिन हम डरते नहीं हैं और आंदोलन करेंगे।महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने कहा, हमने तय किया है कि यह जो आंदोलन है, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए हमें श्रृंखलाबद्ध आंदोलन करने पड़ेंगे क्योंकि यह लंबी लड़ाई है। उसी श्रृंखला में आज जो दिल्ली में रैली हो रही है, उसके समर्थन में हमने मुंबई में यह योजना बनाई।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान व्यक्तिगत सत्याग्रह का जो ऐलान बापू ने किया था, उसी तरह हम लोग भी तिरंगा संविधान पदयात्रा करेंगे। कॉर्पोरेशन ऑफिस के बाहर फिरोजशाह मेहता की प्रतिमा से शुरू करके रीगल सिनेमा सर्कल तक जाएंगे। वहां बीच में आने वाली सारी ऐतिहासिक प्रतिमाओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बाबा साहेब की प्रतिमा तक जाएंगे। वहां से फिर मंत्रालय के बगल में पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी की प्रतिमाओं तक जाकर इसका समापन करेंगे।
तुषार गांधी ने कहा कि यह हमने ऐलान किया था। व्यक्तिगत सत्याग्रह की जो कल्पना थी कि एक ही इंसान करे, उसके मुताबिक मैं सबसे पहले यह करने वाला था। लोगों को जब पता चला तो उन्होंने कहा कि हम भी आएंगे। इसलिए समर्थन में लोग स्वेच्छा से आ रहे हैं। वहां पर पुलिस का रवैया यह है कि वह कह रही है कि प्रतिबंधित क्षेत्र है, हम पदयात्रा नहीं करने देंगे।
उन्होंने कहा कि मैं कह रहा हूं कि आज तो छुट्टी का दिन है। न कोई दफ्तर चालू है, न कोर्ट चालू है और न सरकार चालू है। किसी को तकलीफ होने वाली नहीं है। हम अपने तरीके से यह आंदोलन करेंगे और निकल जाएंगे। हालांकि पुलिस अब जिद पर आ गई है और कहती है कि हम आजाद मैदान के आगे आपको एक कदम भी नहीं जाने देंगे।
तुषार गांधी ने कहा कि हम कोशिश करेंगे। नागरिक कोशिश कर सकता है सत्ता के खिलाफ लेकिन सत्ता अपना रवैया पेश करेगी। मैं मुंबई पुलिस और राज्य सरकार से कहना चाहता हूं कि हम डरते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार के लोग कह रहे हैं कि अराजकता फैलाने के लिए इस तरह के आंदोलन किए जा रहे हैं और लोगों को गुमराह किया जा रहा है और इस प्रकार की बातें सरकार में बैठे हुए कुछ लोग कह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज तक जितने भी आंदोलन हुए- जंतर-मंतर-1, जंतर-मंतर-2 और मुंबई में भी 10 अक्टूबर को अगस्त क्रांति मैदान पर जो आंदोलन हुआ, उसमें अराजकता फैलाने वाले तत्व भाजपा समर्थक थे। अराजकता कौन फैला रहा है, यह जनता स्पष्ट तरीके से देख रही है और जान चुकी है।
तुषार गांधी ने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठ रही है, उस मांग को खारिज करने के लिए भी इन चुनावों का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर चुनाव के पहले ही तय कर लिया जाता है कि क्या नतीजा लाना है, तो उस सिस्टम को हमें चुनौती देनी पड़ेगी। वह सिस्टम जब तक रहेगा, तब तक चुनाव बैलेट पेपर पर कराएं या ईवीएम पर, वे लोग उसके परिणामों को प्रभावित करने में सफल हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि बहुत सांकेतिक है कि उनके दिग्गजों के गढ़ों में जिस तरह उनकी हार हुई है, वह दिखाता है कि लोगों का मन किस तरफ मुड़ चुका है। महाराष्ट्र में आप देखें तो उनके सारे दिग्गजों की जो सीटें थीं, उनकी पराजय हुई है। यह दिखाता है कि लोगों का मूड क्या है।
उन्होंने कहा कि सरकार अब अपने सिंहासन को बचाने के लिए प्रयत्नशील है और उसके लिए वह लोग आंदोलनों को बदनाम करने की चालबाजी कर रहे हैं। जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुए, तो उन्होंने बहुत गहरी चिंता व्यक्त की कि दिल्ली के छोटे और मध्यम व्यापारियों के धंधे ठप हो रहे हैं और दिवाली के पहले उनकी कमाई बंद हो रही है।
उन्होंने कहा कि आज हमने खबर सुनी कि कनॉट प्लेस में सरकार ने जबरन दुकानें बंद करवा दीं, ठेले हटवा दिए ताकि अपने आंदोलन की सफलता को प्रदर्शित कर सके। सरकार की नागरिकों के प्रति कितनी चिंता है, उसका एक उदाहरण आपको यहां मिल रहा है। सरकार को नागरिकों की चिंता नहीं है। सरकार को सिर्फ अपनी सत्ता से चिपके रहने की चिंता है।















