भोपाल। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और बढ़ते दामों के बीच मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम जनता और व्यापारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण अब परिवहन (ट्रांसपोर्ट) व्यवसाय से जुड़े लोग खुलकर सामने आ गए हैं और सरकार से करों में कटौती की मांग कर रहे हैं।
परिवहन उद्योग पर गहराया आर्थिक संकट
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल के दाम लगातार बढ़ने से छोटे और मध्यम स्तर के ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा परेशान हैं। मंदी और काम की कमी के चलते हालात इतने खराब हो चुके हैं कि करीब 25 से 30 प्रतिशत तक व्यावसायिक वाहन खड़े रहने की स्थिति बन गई है। माल ढुलाई का काम कम होने और परिचालन लागत बढ़ने के कारण वाहन मालिकों को बैंकों की ईएमआई (EMI) भरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो यह पूरा सेक्टर आर्थिक रूप से टूट जाएगा।
जनता और किसानों पर दोहरी मार
ईंधन के महंगे होने का असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ रहा है। ट्रक भाड़ा और बस किराया महंगा होने से बाजार में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही किसान भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि खेती में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनें डीजल से ही चलती हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
वैट और सेस कम करने की मांग
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राहत की गुहार लगाई है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश में डीजल और पेट्रोल पर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक वैट (VAT) और अतिरिक्त कर (सेस) लगाया जा रहा है। जनहित को ध्यान में रखते हुए मांग की गई है कि सरकार टैक्स के बोझ को कम करे, ताकि आम जनता, किसानों और ट्रांसपोर्ट उद्योग को बड़ी राहत मिल सके और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें।



