मुरैना, देवेन्द्र सिंह राजपूत। शहर के ओवरब्रिज के पास स्थित श्री हरि मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में 32 वर्षीय प्रसूता कृष्णा राठौर की मौत का मामला सामने आने के बाद निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों के मुताबिक, महिला ने सुबह बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन दोपहर में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन द्वारा उसे ग्वालियर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मुरैना में निजी अस्पतालों में मरीजों की मौत के लगातार सामने आ रहे मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पिछले दो महीनों में अलग-अलग निजी अस्पतालों में सात लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। आरोप हैं कि कुछ अस्पताल नाम और पहचान बदलकर दोबारा संचालन शुरू कर देते हैं। ऐसे में अस्पतालों के लाइसेंस, डॉक्टरों की उपलब्धता, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और आपातकालीन सुविधाओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
वहीं, जिला अस्पताल के आसपास सक्रिय निजी एंबुलेंस संचालकों की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ एंबुलेंस संचालक मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों में पहुंचाने के बदले कमीशन लेते हैं। यह कमीशन कथित तौर पर 10 प्रतिशत तक बताया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निजी अस्पतालों में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी और जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी है? CMHO द्वारा कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बावजूद अब तक कितने मामलों में ठोस कार्रवाई हुई, यह भी जांच का विषय है। प्रसूता की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच, अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।















