बालाघाट, रितेश सोनी: वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। अपनी ही पार्टी के विधायक विवेक (विक्की) पटेल के खिलाफ सार्वजनिक मंच से अमर्यादित टिप्पणी करने वाले पूर्व जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस नेता रामकुमार नगपुरे पर जिला कांग्रेस कमेटी ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष संजय उइके ने आदेश जारी कर नगपुरे को 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।

शरद पूर्णिमा के मंच से गरमाया मामला

यह पूरा विवाद खैरलांजी में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामकुमार नगपुरे ने वारासिवनी से कांग्रेस विधायक विवेक पटेल की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए। बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने सार्वजनिक मंच से विधायक को जूतों की माला पहनाने और खुद जूते मारने तक की बात कह डाली। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया।

विकास कार्यों और ठेकेदारी पर उठाए थे सवाल

नगपुरे ने केवल व्यक्तिगत हमला ही नहीं किया, बल्कि क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर भी विधायक को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सड़कों का केवल भूमिपूजन हुआ है लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है। खैरलांजी क्षेत्र की करीब 30 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की स्थिति और ठेकेदारी व्यवस्था में चुनिंदा लोगों को तरजीह दिए जाने के गंभीर आरोप भी उन्होंने लगाए।

पूर्व मंत्री की तारीफ और पार्टी विधायक पर निशाना

भाषण के दौरान रामकुमार नगपुरे ने अपनी ही पार्टी के विधायक को 'पागल' करार देने के साथ-साथ पूर्व खनिज मंत्री प्रदीप (गुड्डा) जायसवाल के कार्यकाल की खुलकर तारीफ की। अपनी ही पार्टी के निर्वाचित विधायक के खिलाफ मोर्चा खोलना और विपक्षी दल के नेता की प्रशंसा करना कांग्रेस संगठन के लिए अनुशासनहीनता की सारी हदें पार करने जैसा साबित हुआ, जिसके बाद संगठन ने यह कड़ा कदम उठाया।

अनुशासन का डंडा और आगे की सियासत

वीडियो वायरल होने के बाद मामला सीधे जिला संगठन तक पहुंचा। इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ मानते हुए जिला अध्यक्ष संजय उइके ने त्वरित कार्रवाई की और रामकुमार नगपुरे को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस कार्रवाई के बाद वारासिवनी और बालाघाट की राजनीति में गर्माहट आ गई है। अब देखना यह होगा कि इस निष्कासन के बाद पार्टी के भीतर का असंतोष थमता है या आने वाले समय में राजनीतिक उठापटक और तेज होती है।