भोपाल। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रसिद्ध जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए एक आनुवंशिक अध्ययन में राजस्थान के आबादी इतिहास को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इस शोध के अनुसार, राजस्थान की वर्तमान आबादी का आनुवंशिक पैटर्न (Genetic Pattern) पाकिस्तान की तुलना में मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर-मध्य भारत के आबादी समूहों से अधिक मेल खाता है।


पुराने दावों का खंडन और 2,000 सैंपलों पर आधारित नया अध्ययन

लुइस क्विंटाना-मुर्सी व उनके साथियों द्वारा किए गए 669 सैंपलों के अध्ययन में दावा किया गया था कि राजस्थान और पाकिस्तान क्षेत्र की आबादी के बीच मातृवंशीय डीएनए व वाई-क्रोमोसोम के आधार पर करीबी संबंध हैं। BHU की टीम ने 2,000 स्वस्थ एवं असंबंधित व्यक्तियों (जिनमें 202 मीणा, 150 गुर्जर और 317 राजस्थान की मिश्रित आबादी के लोग शामिल थे) के रक्त नमूने लिए। वैज्ञानिकों ने डीएनए के 20 बहुरूपी ऑटोसोमल एसटीआर (STR) स्थानों का तुलनात्मक अध्ययन किया। विश्लेषण में मीणा, गुर्जर और मिश्रित राजस्थान आबादी के आनुवंशिक पैटर्न पाकिस्तान की तुलना में उत्तर और मध्य भारत के लोगों के अत्यधिक समान पाए गए।


मध्य प्रदेश और गुजरात से आनुवंशिक समानता के मायने

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि इस आनुवंशिक नजदीकी का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि राजस्थान के लोग मध्य प्रदेश या गुजरात से जाकर बसे हैं: प्रो. चौबे के अनुसार, राजस्थान के आनुवंशिक इतिहास को केवल पश्चिम (पाकिस्तान) की ओर से आए एकतरफा मार्ग से नहीं समझा जा सकता। इसमें मध्य भारत, पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं से हुए ऐतिहासिक आबादी आवागमन के संकेत मिलते हैं। दो आबादियों के डीएनए में मौजूद आनुवंशिक संकेत (Genetic Markers) जितने अधिक समान होते हैं, उन्हें आनुवंशिक रूप से उतना ही करीब माना जाता है।


भील आबादी में 'पैन-भील' छाप और 'आनुवंशिक सेतु' के रूप में राजस्थान

राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करने वाली भील आबादी के आंकड़ों के विश्लेषण में एक साझा पुरानी 'पैन-भील' पूर्वज की आनुवंशिक छाप पाई गई है। गुजरात के भीलों में आसपास की आबादियों के साथ आनुवंशिक मिश्रण अपेक्षाकृत कम है, जबकि राजस्थान के भीलों में आसपास की जातियों और जनजातियों के साथ अधिक विविधता देखी गई है। इस आधार पर राजस्थान इन चारों राज्यों की आबादियों के बीच एक 'आनुवंशिक सेतु' (Genetic Bridge) का कार्य करता है।


52 हजार साल पुराने मातृवंशीय डीएनए और स्थानीय आबादी की निरंतरता

ध्ययन में राजस्थान की वर्तमान आबादी में लगभग 52,000 वर्ष पुराने मातृवंशीय डीएनए संकेतों (जैसे M, R5 और U2i) का उल्लेख है, जो दक्षिण एशिया में आधुनिक मानवों के शुरुआती बसाव से जुड़े हैं।


निष्कर्ष: राजस्थान की वर्तमान सामाजिक और आनुवंशिक संरचना के निर्माण में केवल हाल के दौर में बाहर से आए लोगों का प्रभाव नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही स्थानीय आबादी की निरंतरता (Continuity) इसका मुख्य आधार रही है।