काठमांडू। नेपाल और तिब्बत (चीन) की सीमा पर बुधवार सुबह प्रकृति ने भीषण तबाही मचाई। सीमावर्ती ल्हेंदे नदी घाटी में पहाड़ का एक विशालकाय हिस्सा और ग्लेशियर टूटने से नदियों में अप्रत्याशित सैलाब आ गया। 30 फीट ऊंची पानी और मलबे की सुनामी जैसी लहरों में घर, गाड़ियां, 19 पुल, 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पलक झपकते ही तबाह हो गए।
इस जलप्रलय में अब तक 165 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 162 मौतें नेपाल में और 3 तिब्बत में हुई हैं। आपदा में 1,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 133 भारतीय तीर्थयात्री और 37 एनआरआई शामिल हैं।
भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से पैदा हुआ 5.2 तीव्रता का झटका
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे काठमांडू के उत्तरी सीमावर्ती इलाके में धरती कांप उठी। शुरुआत में इसे भूकंप माना गया, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने स्पष्ट किया कि तिब्बत क्षेत्र में ल्हेंदे नदी में बर्फ और भारी चट्टानों के साथ पहाड़ का बहुत बड़ा हिस्सा (लैंडस्लाइड/ग्लेशियर बस्ट) सीधे नदी में आ गिरा।
यह लैंडस्लाइड इतना शक्तिशाली था कि इससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर तीव्र कंपन पैदा हुआ। इसके बाद ल्हेंदे, भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भयानक वेग के साथ पानी व मलबे का ज्वार उठ गया, जिससे निचले इलाकों में संभलने तक का मौका नहीं मिला।
150 किमी दूर तक बहे लोग, 133 भारतीयों समेत सैकड़ों लापता
बाढ़ का प्रवाह इतना प्रचंड था कि लोगों, मलबों और वाहनों को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां से अब तक 33 शव निकाले जा चुके हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गए।
नेपाल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, लापता लोगों में 466 विदेशी नागरिक और 113 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशियों में 133 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई हैं, जिनकी खोजबीन के लिए नेपाल सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन दल खराब मौसम व टूटे रास्तों के बीच युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।
भारत में अलर्ट: बिहार और पूर्वी यूपी में बाढ़ का गंभीर खतरा
नेपाल की त्रिशूली नदी का पानी भारत में प्रवेश करने वाली गंडक नदी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय मौसम एवं जल आयोग ने नेपाल की तरफ से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव (बाढ़ की लहर) आने की चेतावनी जारी की है।
इसे देखते हुए बिहार के सीमावर्ती जिलों—पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों में भी प्रशासन को सतर्क रहने और निचले इलाकों को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं।




