नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐसे मामलों में न्यायालय सामान्यतः हस्तक्षेप नहीं कर सकता, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव संबंधी विवादों का निपटारा चुनाव सम्पन्न होने के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से किया जाता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि नामांकन निरस्त होने जैसे मामलों में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की अनुमति दी जाती है तो हर चुनावी विवाद में अलग-अलग जांच की आवश्यकता पड़ेगी, जो संविधान की मंशा के विपरीत होगा। अदालत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत इस प्रकार की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उम्मीदवार का चुनाव याचिका दाखिल करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा और वह चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद कानूनी विकल्प अपना सकती हैं।
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें शुरुआती चरण में ही चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए थी और यदि उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उनकी हार होती।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस के पास आवश्यक संख्या बल भी मौजूद था, लेकिन 9 जून को उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। भाजपा ने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी ने अपने खिलाफ दर्ज एक प्रकरण की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी थी। इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए थे।



