मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में स्वास्थ्य विभाग की आउटसोर्स भर्ती को लेकर सामने आए कथित घोटाले ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. चौहान के निलंबन के बाद अब उनके भतीजे, निजी आउटसोर्स कंपनी, कुछ सरकारी डॉक्टरों और कथित दलालों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर 70 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की कथित वसूली के आरोप लगाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले चरण में 66 पदों पर नियुक्तियां होनी थीं, जबकि बाद में अलग-अलग चरणों में 300 से अधिक कर्मचारियों की भर्ती प्रस्तावित थी। आरोप है कि निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए 245 से ज्यादा नियुक्तियां कर दी गईं। आरोप यह भी है कि भर्ती प्रक्रिया में नौकरी का आश्वासन देकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई।
प्रारंभिक जांच के बाद कलेक्टर की अनुशंसा पर उज्जैन संभागायुक्त ने CMHO डॉ. चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि अब मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है। पूरे भर्ती प्रकरण में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग तेज हो गई है।
मंदसौर विधायक विपिन जैन ने आरोप लगाया है कि CMHO, उनके भतीजे और निजी कंपनी से जुड़े लोगों ने मिलकर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं और बेरोजगारों से कथित रूप से पैसे वसूले। उन्होंने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त कार्रवाई नहीं है, बल्कि पूरे मामले में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष एवं व्यापक जांच कराई जानी चाहिए।
वहीं यह आरोप भी सामने आए हैं कि कुछ लोगों ने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर नियुक्तियां दिलाने के नाम पर भी अभ्यर्थियों से धनराशि ली। अब प्रशासनिक जांच से यह स्पष्ट होगा कि भर्ती प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही और कथित वसूली का नेटवर्क कितना व्यापक था। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।




