लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने नीट परीक्षा विवाद और जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर बड़ा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लगातार कई पोस्ट जारी करते हुए बसपा प्रमुख ने निवर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के दोषियों पर सख्त कार्रवाई और छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) वापस लेने की पुरजोर मांग की है।

मायावती ने अपने बयान में लिखा कि देश के छात्रों और युवाओं के व्यापक आंदोलन के दबाव के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिए जाने का फैसला बिल्कुल उचित है। हालांकि, यदि यह निर्णय पहले ही ले लिया जाता तो देश और छात्रों के लिए ज्यादा बेहतर होता। बसपा प्रमुख ने केंद्र सरकार से अपेक्षा जताते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लड़के और लड़कियों पर जिन पुलिसकर्मियों ने बर्बरतापूर्वक लाठियों व डंडों से हमला किया, जिससे बड़ी संख्या में छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उन पर तत्काल सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

विशेष रूप से दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर कड़ा एतराज जताते हुए मायावती ने कहा कि जिन पुरुष पुलिसकर्मियों ने आंदोलनरत छात्राओं के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की तथा अनुचित बल प्रयोग किया, उन्हें तुरंत चिन्हित किया जाए। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ क्रिमिनल केस चलाकर सख्त कानूनी सजा दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी इस तरह की घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।


छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस ले सरकार

आंदोलनकारी युवाओं के भविष्य की चिंता जताते हुए बीएसपी प्रमुख ने मांग की है कि सरकार को आंदोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के खिलाफ जो भी एफआईआर (FIR) या शिकायतें दर्ज की गई हैं, उन सभी को अविलंब वापस ले लिया जाना चाहिए। इससे हमारे युवाओं को आगे चलकर थानों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनका कीमती भविष्य भी खराब होने से बच सकेगा, जिससे देश में पुनः सौहार्दपूर्ण वातावरण निर्मित हो सकेगा।


'अपने संघर्ष का राजनीतिकरण न होने दें'

अपने वक्तव्य के अंत में मायावती ने देश के आंदोलनरत सभी छात्रों और युवाओं को महत्वपूर्ण सलाह भी दी। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सभी आंदोलनकारी इस संवेदनशील मामले में किसी भी राजनीतिक पार्टी को अपने इस पवित्र संघर्ष का राजनीतिकरण न करने दें और अपने भविष्य को भी सुरक्षित रखते हुए सतर्क रहें।