कटनी। जिले की ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत लालपुर का 'सगवा' गांव इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का दंश झेल रहा है। गांव की बदहाली और उफनते नालों को पार कर स्कूल जाते मासूम बच्चों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी विकास के तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है।


मौत के साये में शिक्षा पाने की मजबूरी

सगवा गांव में आज तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं पहुंच सकी है। आलम यह है कि बारिश के मौसम में स्कूली बच्चों, महिलाओं और आम ग्रामीणों को कीचड़, दुर्गम रास्तों और उफनती नदियों-नालों को पार कर आवागमन करना पड़ रहा है। रोज़ अपनी जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंचने वाले मासूमों की तस्वीरें प्रशासनिक संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।


वर्षों से मांग, पर ज़िम्मेदार बेखबर

ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से सड़क निर्माण की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों की उदासीनता के चलते आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। जिला पंचायत और जनपद पंचायत के अधिकारी नियमित निरीक्षण के दावे तो करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई की होती, तो आज बच्चों को इस तरह प्राणघातक स्थिति से न गुज़रना पड़ता।


कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

गांव के बिगड़ते हालात को देखते हुए ग्रामीणों ने कटनी कलेक्टर से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों ने अपील की है कि:

* गैर-ज़िम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाए।

* गांव में प्राथमिकता के आधार पर पक्की सड़क और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए।


ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


उठता बड़ा सवाल

एक ओर सरकार शिक्षा के अधिकार और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर सगवा गांव के बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसी अप्रिय घटना का इंतज़ार करता है या समय रहते इन मासूमों को इस समस्या से मुक्ति दिलाता है।