नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कृषि ऋणों (लोन) के लिए दस्तावेजी सत्यापन (वेरिफिकेशन) को और सख्त बनाने तथा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) की गणना से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य कृषि ऋण वितरण की निगरानी को मजबूत करना और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है।आरबीआई द्वारा जारी 'भारतीय रिजर्व बैंक (प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य एवं वर्गीकरण) निर्देश, 2026' के मसौदे के अनुसार, कृषि क्षेत्र में दिए जाने वाले ऋणों की निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को अधिक कठोर बनाया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर 26 नवंबर तक सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
प्रस्ताव के तहत सोने के बदले दिए जाने वाले कृषि ऋणों के लिए अधिक विस्तृत सत्यापन व्यवस्था अपनाई जाएगी। बैंकों को उस कृषि भूमि का स्थान, उगाई जा रही फसल का विवरण और जहां लागू हो वहां फसलों पर हाइपोथेकेशन (गिरवीकरण) से संबंधित जानकारी का रिकॉर्ड रखना होगा।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि कृषि गतिविधियों के लिए दिया गया लोन केवल इसलिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की श्रेणी से बाहर नहीं माना जाएगा क्योंकि उसके लिए गिरवी रखी गई संपत्ति सोने के आभूषण या अन्य स्वर्ण वस्तुएं हैं। हालांकि बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऋण राशि का निर्धारण कृषि गतिविधि की वास्तविक वित्तीय आवश्यकता और निर्धारित वित्तीय मानकों के आधार पर किया गया हो, न कि केवल गिरवी रखी गई संपत्ति के मूल्य के आधार पर।
मसौदे के अनुसार, बैंक अधिकारियों को कृषि ऋण के उपयोग की निगरानी के लिए फील्ड विजिट का रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसके अलावा भूमिहीन कृषि मजदूरों और बटाईदार किसानों के मामलों में, जहां भूमि रिकॉर्ड या पट्टा दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते, वहां पात्रता साबित करने के लिए अन्य सत्यापन योग्य दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे।
आरबीआई ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की गणना में लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) के तहत डिस्काउंट किए गए व्यापारिक बिलों के लेखांकन तरीके में भी बदलाव का प्रस्ताव किया है। मसौदे के अनुसार, ऐसे बिलों को नेट बैंक क्रेडिट (एनबीसी) और समायोजित नेट बैंक क्रेडिट (एएनबीसी) की गणना से बाहर नहीं रखा जाएगा।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंक इन एक्सपोजर को जोखिम और पूंजी पर्याप्तता संबंधी गणनाओं के लिए इंटरबैंक एक्सपोजर के रूप में मान सकते हैं, लेकिन उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की गणना से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।













