मुंबई। फिल्म ‘सहिया’ के निर्माता एवं निर्देशक संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा उनकी फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार किए जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। संजय शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा अधिवक्ता मोहम्मद हैदर और मोहम्मद तलहा पैरवी करेंगे।संजय शर्मा ने कहा कि ‘सहिया’ प्रेम, मानवीय संवेदना और कठिन परिस्थितियों में जीवन बचाने के संघर्ष की कहानी है। फिल्म झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र की पृष्ठभूमि में एक नवविवाहित दंपती की यात्रा को सामने लाती है। इसके केंद्र में वे साधारण लोग हैं, जिनके सपने और रिश्ते हिंसा, भय तथा संदेह के वातावरण में प्रभावित होते हैं।
निर्माता एवं निर्देशक का कहना है कि फिल्म के आशय और उसके मानवीय पक्ष को समग्रता में समझना आवश्यक है। उनके अनुसार, ‘सहिया’ हिंसा के बीच आम लोगों की पीड़ा और प्रेम की ताकत को सामने रखती है। संजय शर्मा ने सेंसर बोर्ड के निर्णय को चुनौती देते हुए न्यायालय से मामले में हस्तक्षेप और उचित राहत की अपेक्षा की है।
संजय शर्मा ने कहा, “सहिया की आत्मा प्रेम है। यह दो साधारण लोगों की कहानी है, जो अपना जीवन साथ जीना चाहते हैं, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में फंस जाते हैं, जहां उनकी पहचान, उनकी सुरक्षा और उनका भविष्य संकट में पड़ जाता है। फिल्म के जरिए हमने उन लोगों की भावनाओं को सामने रखने की कोशिश की है, जिनकी आवाज अक्सर हिंसा और संघर्ष की बड़ी खबरों के बीच दब जाती है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा उद्देश्य हिंसा का महिमामंडन करना नहीं है। हम यह दिखाना चाहते हैं कि हिंसा की सबसे बड़ी कीमत साधारण इंसान चुकाता है। किसी क्षेत्र की कठिन वास्तविकताओं को पर्दे पर दिखाना और वहां के लोगों के दर्द को समझने की कोशिश करना सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है। सहिया को इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।”
संजय शर्मा के अनुसार, फिल्म को प्रमाणपत्र दिलाने के लिए उन्होंने सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया में भाग लिया और अपना पक्ष रखा। प्रमाणपत्र न मिलने से फिल्म की रिलीज और उससे जुड़ी तैयारियां प्रभावित हुई हैं। अब उन्होंने अपने पक्ष को न्यायालय के समक्ष रखने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया है।
उन्होंने कहा, “एक फिल्म के पीछे कलाकारों, तकनीशियनों और पूरी टीम की लंबी मेहनत होती है। फिल्म की रिलीज प्रभावित होने का असर उन सभी लोगों पर पड़ता है, जिन्होंने इसे बनाने में अपना समय और श्रम दिया है। मेरे लिए यह आर्थिक निवेश के साथ-साथ उस मेहनत और भरोसे का भी सवाल है।”
‘सहिया’ में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी और रिंकू राजगुरु जैसे कलाकारों ने अभिनय किया है। झारखंड की पृष्ठभूमि और वहां के प्राकृतिक परिवेश में फिल्माई गई यह फिल्म एक संवेदनशील मानवीय कहानी को दर्शकों के सामने लाने का प्रयास करती है।
संजय शर्मा ने कहा कि कठिन सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित कहानियों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करने के लिए फिल्मकारों को उचित अवसर मिलना चाहिए। किसी फिल्म के संदेश को समझने के लिए उसके कथानक, पात्रों और संपूर्ण संदर्भ पर विचार करना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “सहिया उन लोगों की कहानी है, जो भय और संघर्ष के बीच भी प्रेम, भरोसे और जीवन की उम्मीद को बचाए रखना चाहते हैं। हमारी अपेक्षा है कि फिल्म को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाए और हमारा पक्ष सुना जाए। दर्शकों तक इस कहानी को पहुंचाने के लिए हम अपना पक्ष न्यायालय के सामने रखेंगे।”
14 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में संजय शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा अधिवक्ता मोहम्मद हैदर और मोहम्मद तलहा पक्ष रखेंगे। संजय शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है और वे न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “हमें न्यायालय से न्याय की उम्मीद है। हम चाहते हैं कि सहिया की कहानी दर्शकों तक पहुंचे और वे उसके मानवीय संदेश को स्वयं समझ सकें। आगे की कार्रवाई न्यायालय की सुनवाई और निर्देशों के अनुसार की जाएगी।”












