छिंदवाड़ा, जीशान अंसारी। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से करीब 10 किलोमीटर दूर जमानिया गांव में नवरात्रि के दौरान अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां आदिवासी समाज के लोग रावण की प्रतिमा स्थापित कर नौ दिनों तक रावण पेन के रूप में पूजा-अर्चना करते हैं। जहां नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना की जाती है, वहीं इस गांव में आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार रावण पेन की पूजा करता है।
समिति के सदस्यों के अनुसार, जमानिया गांव में यह परंपरा पिछले नौ वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। नवरात्रि के दौरान समाज के लोग एकत्रित होकर विधि-विधान से पूजा करते हैं। नौ दिनों की आराधना पूरी होने के बाद प्रतिमा का नदी में विसर्जन किया जाता है।
आदिवासी समाज के लोगों की मान्यता है कि रावण पेन उनके पूर्वजों से जुड़े हैं और उन्हें मरावी गोत्र से संबंधित माना जाता है। समाज में 750 गोत्र होने की मान्यता का उल्लेख करते हुए सदस्य रावण पेन को भी अपने वंशजों में शामिल मानते हैं। इसी आस्था और परंपरा के चलते यहां हर वर्ष रावण पेन की पूजा की जाती है। जमानिया गांव की यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और आदिवासी समाज की विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं को दर्शाती है।
















