बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के घने जंगलों और सुदूर पहाड़ों में बसे विशेष पिछड़ी 'बैगा जनजाति' के गांवों में जब मासूम बच्चों की असमय मौतों का संकट गहराया, तो सत्ता के गलियारों में बैठकर केवल निर्देश देने के बजाय सूबे के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने सीधे 'ग्राउंड जीरो' पर उतरकर जनसेवा की मिसाल पेश की। दशकों तक उपेक्षित रहे और लंबे समय तक नक्सली साए में जीने वाले बोंदारी और कोरका जैसे अत्यंत दुर्गम वनांचल में पहुंचकर मुख्यमंत्री ने शासन और आदिवासियों के बीच की दूरी को एक झटके में पाट दिया। प्रदेश के इतिहास में यह पहला अवसर रहा जब किसी मुख्यमंत्री ने प्रोटोकॉल और सुरक्षा की दीवारें तोड़कर आदिवासी चौपाल में जमीन पर बैठकर बैगा परिवारों का दुख साझा किया और उनके आंसुओं को पोंछते हुए सरकार के संबल का विश्वास दिलाया।


दशकों पुरानी रूढ़िवादिता और संवादहीनता बनी थी चुनौती

बालाघाट के इन दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य संकट की जड़ें दशकों पुराने अंधविश्वास और जागरूकता के अभाव में धंसी थीं। प्राथमिक रिपोर्टों से यह स्पष्ट हुआ था कि: आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के प्रति झिझक के चलते कई परिवार गंभीर रूप से बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और तांत्रिक उपायों पर निर्भर रहते थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली जीवनरक्षक दवाओं के उपयोग को लेकर भ्रांतियां थीं, संवाद के अभाव में लोग उन्हें फेंक देते थे या समय पर सेवन नहीं कराते थे। वनांचल की कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य संदेशों की पहुंच न होने से साधारण मौसमी बीमारियां भी विकराल रूप ले लेती थीं।


मुख्यमंत्री की सीधी पहल: 'दवा भी, दुआ भी और विकास का स्थायी समाधान भी'

इस मानवीय संकट को राजनीतिक या सामान्य प्रशासनिक नजरिये से देखने के बजाय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दूरदर्शी अभिभावक की तरह मिशन मोड में काम शुरू कराया:

पीड़ित परिवारों को तात्कालिक राहत: अपने मासूमों को खो चुके शोकाकुल आदिवासी परिवारों को संबल देने के लिए मुख्यमंत्री ने मौके पर ही प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹2-2 लाख की त्वरित आर्थिक सहायता स्वीकृत की, ताकि इस कठिन समय में उनके जीवनयापन पर संकट न आए।


100 गांवों की तस्वीर बदलेगा ₹225 करोड़ का महापैकेज: केवल फौरी राहत तक सीमित न रहकर मुख्यमंत्री ने इस इलाके के कायाकल्प का मास्टरप्लान घोषित किया। क्षेत्र के 100 बैगा गांवों के समग्र विकास के लिए ₹225 करोड़ का विशेष पैकेज मंजूर किया गया है। इसके तहत बारहमासी पक्की सड़कों का निर्माण, हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल, आधुनिक उप-स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक उपचार इकाइयों की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।


अविश्वास की दीवार तोड़ने संवाद अभियान: मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों को इन गांवों में तैनात किया गया है। ये टीमें केवल दवाएं नहीं बांट रहीं, बल्कि बैगा समाज के बुजुर्गों और प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद स्थापित कर झाड़-फूंक के अंधविश्वास को खत्म करने और सरकारी दवाइयों के प्रति विश्वास जगाने का जन-जागृति अभियान चला रही हैं।


'अंत्योदय' का सशक्त प्रमाण: जहां पहुंचना नामुमकिन समझा जाता था, वहां पहुंचा शासन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस सक्रियता और सहृदयता ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार में पंक्ति के अंतिम छोर पर खड़े वनवासी परिवार की जान और गरिमा सर्वोपरि है। जहां पहले प्रशासन के कदम पड़ने में महीनों लग जाते थे, वहां मुख्यमंत्री की सीधी मौजूदगी ने समूचे प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह बना दिया है। आदिवासियों के बीच जमीन पर बैठकर समस्याओं को समझने और ₹225 करोड़ के विकास की मजबूत बुनियाद रखने की यह पहल डॉ. मोहन यादव के जन-सरोकारी और संवेदनशील नेतृत्व का सशक्त प्रमाण बनकर उभरी है।