नई दिल्ली। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने गुरुवार को नाउरू की संसद के अध्यक्ष मार्कस स्टीफन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

नाउरू की राजधानी यारेन स्थित ऐतिहासिक संसद भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान मार्गेरिटा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें संसद अध्यक्ष के कार्यालय में लगी देखीं।

मार्गेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नाउरू की संसद के अध्यक्ष मार्कस स्टीफन से ऐतिहासिक संसद भवन में मुलाकात करके उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि संसद अध्यक्ष के कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तस्वीरें देखकर अच्छा लगा। यह दोनों जीवंत लोकतंत्रों के बीच मित्रता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और संसदीय सहयोग तथा क्षमता निर्माण को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की।

विदेश राज्य मंत्री ने नाउरू में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की और भारत-नाउरू संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।

उन्होंने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि नाउरू में भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत हुई। उन्होंने भारत और नाउरू के संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान तथा दोनों देशों के लोगों के बीच नजदीकी बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की।

इससे पहले दिन में मार्गेरिटा ने नाउरू में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के पूर्व छात्रों से भी मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि इन पूर्व छात्रों से बातचीत के दौरान भारत में उनके अनुभवों के बारे में जानने का अवसर मिला। उनके अनुभव दर्शाते हैं कि भारत की क्षमता निर्माण संबंधी पहल कौशल विकास और भारत-नाउरू साझेदारी को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं। मार्गेरिटा समोआ में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद नाउरू पहुंचे हैं। उनकी यात्रा के तीसरे चरण में कुक आइलैंड्स जाने का कार्यक्रम है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और नाउरू के बीच मैत्रीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। भारत नाउरू का एक महत्वपूर्ण विकास साझेदार है और प्रशांत महासागर के इस द्वीपीय देश में भारत की सहायता को व्यापक मान्यता प्राप्त है। मंत्रालय के मुताबिक, नाउरू भारत को विशेष महत्व देता है। वर्ष 1960 के दशक की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र में नाउरू की स्वतंत्रता का प्रस्ताव सबसे पहले भारत ने रखा था।