गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को घोषणा की कि तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 208 करोड़ रुपए का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने से उत्तरी असम के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उनके करीब मिल सकेंगी। इससे परिवारों को विशेष इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो जाएगी।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि प्रस्तावित सुविधा में सात विशेष विभाग होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, "परिवारों को इलाज के लिए दूर जाने के बोझ के बिना मरीज के पूरी तरह से ठीक होने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलना चाहिए।" उन्होंने क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।
इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मौजूदा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे सोनितपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को विशेष चिकित्सा सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।
यह पहल उत्तरी असम के मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वहां, बीमारी की गंभीरता और जरूरी इलाज के आधार पर मरीजों को अक्सर बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए गुवाहाटी जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक जाना पड़ता है।
इन विशेष विभागों के जुड़ने से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं का दायरा बढ़ेगा, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक और यात्रा संबंधी बोझ कम हो सकता है।
हालांकि इन सात विभागों, निर्माण की समय-सीमा, प्रस्तावित बेड की संख्या और इसके शुरू होने की संभावित तारीख के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब असम मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और विशेष उपचार सुविधाओं का विस्तार करके अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने गुवाहाटी के बाहर भी मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क फैलाया है।
इस तरह के निवेश का उद्देश्य यह है कि बेहतर इलाज की सुविधाएं केवल कुछ शहरी केंद्रों तक ही सीमित न रहें, बल्कि पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर हो सके।
तेजपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, सोनितपुर और आसपास के इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है। प्रस्तावित सुपर-स्पेशियलिटी सुविधा से इसकी क्षमता और बढ़ेगी, जिससे उन मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा जिन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है।

















