भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने के आरोपों पर अपना रुख साफ करते हुए बड़ा बयान दिया है। हाईकोर्ट द्वारा उनके खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज होने के बाद मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में 7 विधानसभा चुनाव लड़े हैं, लेकिन कभी भी कोई जानकारी नहीं छिपाई। इससे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर) की डिवीजन बेंच ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का हवाला दिया: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 329(b) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव संबंधी किसी भी विवाद में सीधे रिट याचिका (Writ Petition) पोषणीय (Maintainable) नहीं है। बेंच ने कहा कि चुनाव परिणाम या हलफनामे में गलत जानकारी को चुनौती देने के लिए अधिनियम की धारा 80 और 81 के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करना ही वैधानिक उपाय है। जब कानून में वैकल्पिक उपाय मौजूद हैं, तो चुनाव आयोग को निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।
100 करोड़ की संपत्ति छिपाने का था आरोप
सागर की सुरखी विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी नीरज शर्मा ने हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने चुनाव के दौरान जमा किए गए अपने शपथ पत्र (Affidavit) में लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति की जानकारी छिपाई थी। मंत्री के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों के लिए कानूनन चुनाव याचिका का ही रास्ता तय है, जिसे समय-सीमा में दायर किया जाना अनिवार्य होता है।
फैसले के बाद मंत्री गोविंद सिंह का बयान
हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा: मैंने अपने जीवन में 7 विधानसभा चुनाव लड़े हैं और कभी भी कोई जानकारी नहीं छिपाई। यह याचिका पूरी तरह झूठी और मेरी राजनीतिक छवि को धूमिल कर सस्ती लोकप्रियता पाने के उद्देश्य से लगाई गई थी। पहले भी हाईकोर्ट ऐसी ही एक याचिका निरस्त कर चुका है। मुझे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।"




