मुंबई। 90 के दशक का बॉलीवुड संगीत आज भी लोगों की यादों में बसा हुआ है। उस दौर में कुमार सानू, उदित नारायण जैसे गायकों की आवाजें हर घर में सुनाई देती थीं। अब एक बार फिर उस सुनहरे दौर की यादें ताजा होने वाली हैं। दरअसल, बॉलीवुड के दो दिग्गज प्लेबैक सिंगर कुमार सानू और उदित नारायण ने हाल ही में मुलाकात की। इस दौरान कुमार सानू ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नए खास प्रोजेक्ट की ओर इशारा किया।कुमार सानू ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उदित नारायण के साथ एक तस्वीर शेयर की। फोटो में दोनों पुराने दोस्तों की तरह एक-दूसरे को गले लगाते नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ कुमार सानू ने लिखा, ''अपने प्यारे दोस्त उदित नारायण से मिलकर बहुत अच्छा लगा। कुछ अच्छा आने वाला है।''
कुमार सानू के इस छोटे से कैप्शन ने फैंस की उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि, दोनों ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह किस प्रोजेक्ट पर साथ काम कर रहे हैं। लेकिन इस पोस्ट के बाद माना जा रहा है कि दोनों की आवाजें जल्द ही किसी नए गाने में एक साथ सुनाई दे सकती हैं।
कुमार सानू और उदित नारायण इससे पहले भी कई गानों में साथ काम कर चुके हैं। दोनों ने साथ में 'तेरी मेरी दोस्ती', 'बेवफा बहुत दिन घूमे', 'छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया', 'हम साथ-साथ हैं' और 'अपना बॉम्बे टॉकीज' जैसे गानों में आवाज दी है।
कुमार सानू की बात करें तो उन्होंने 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में हिंदी फिल्म संगीत में अपनी मजबूत पहचान बनाई। साल 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' के गानों ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म के लगभग सभी गानों में उनकी आवाज सुनाई दी और इसके बाद वह उस दौर के सबसे लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हो गए। उन्होंने सिनेमा को 'ऐ सनम चाहिए', 'मैं दुनिया भुला दूंगा', 'तुझे देखा तो','मेरा दिल भी कितना पागल है', 'सोचेंगे तुम्हें प्यार', 'दिल है कि मानता नहीं', 'चुरा के दिल मेरा', 'बाजीगर ओ बाज़ीगर', 'आंखों की गुस्ताखियां' जैसे शानदार गाने दिए।
कुमार सानू के नाम एक खास रिकॉर्ड भी दर्ज है। साल 1993 में उन्होंने एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड किए थे। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। उनके कई गानों को बीबीसी की 'टॉप 40 बॉलीवुड साउंडट्रैक ऑफ ऑल टाइम' की लिस्ट में भी शामिल किया गया। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2009 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। वह टीवी के कई म्यूजिक रियलिटी शोज में बतौर जज और मेंटर भी नजर आ चुके हैं।
वहीं उदित नारायण भी भारतीय फिल्म संगीत के सबसे बड़े नामों में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार गाने दिए और चार नेशनल फिल्म अवॉर्ड अपने नाम किए। उन्हें 'लगान' के 'मितवा', 'दिल चाहता है' के 'जाने क्यों लोग', 'जिंदगी खूबसूरत है' के 'छोटे छोटे सपने' और 'स्वदेस' के 'ये तारा वो तारा' जैसे गानों के लिए सम्मान मिला। उनको साल 2005 में भोजपुरी फिल्म 'कब होई गवना हमार' के निर्माता के तौर पर भी नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था। भारतीय संगीत में उनके योगदान को महान गायिका लता मंगेशकर ने भी सम्मान दिया था। उन्होंने उदित नारायण को 'प्रिंस ऑफ प्लेबैक सिंगिंग' का खिताब दिया था।
उदित नारायण ने साल 1980 में फिल्म 'उन्नीस-बीस' से हिंदी प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा था। इस फिल्म में उन्होंने दिग्गज गायक मोहम्मद रफी के साथ गाना गाया था। नेपाली संगीत में उनके योगदान के लिए नेपाल के राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव ने साल 2001 में उन्हें 'ऑर्डर ऑफ गोरखा दक्षिण बाहु' से सम्मानित किया था।




