दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 का राजनैतिक मुकाबला अब और भी बहुकोणीय और दिलचस्प हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी (आसपा) जैसे प्रमुख राजनैतिक दलों के बीच अब भारतीय गण वार्ता पार्टी की उम्मीदवार के रूप में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह (संजना नंद गिरि) ने भी आधिकारिक तौर पर चुनावी मैदान में कदम रख दिया है। संजना सिंह ने दतिया में अपने केंद्रीय चुनावी कार्यालय का भव्य उद्घाटन करने के साथ ही क्षेत्र में धुआंधार प्रचार अभियान का शंखनाद कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा उन्हें 'बैटरी टॉर्च' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।


मध्य प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर शासकीय सेवक होने का गौरव

दतिया के चुनावी दंगल में उतरीं संजना सिंह का अतीत काफी प्रेरणादायी रहा है। मूल रूप से भोपाल की रहने वाली संजना सिंह मध्य प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी के रूप में इतिहास रच चुकी हैं।


  • प्रशासनिक अनुभव: उन्होंने मध्य प्रदेश शासन के 'सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग' में लंबे समय तक अपनी उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं।
  • सामाजिक पहचान: समाज में उनकी सक्रियता को देखते हुए वे 'स्वच्छ भारत मिशन' की ब्रांड एंबेसडर और राज्य निर्वाचन आयोग की 'स्टेट आइकॉन' भी रह चुकी हैं।
  • अध्यात्म की ओर झुकाव: लगभग दो वर्ष पूर्व उन्होंने समाज सेवा और आध्यात्मिक मार्ग को चुनने के लिए अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे किन्नर अखाड़े में शामिल हो गईं, जहां उनकी विद्वता और निष्ठा को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित 'महामंडलेश्वर' की उपाधि से विभूषित किया गया।


"मां पीतांबरा ने मुझे दतिया के लिए चुना है, अब समाज का ऋण चुकाने की बारी"

दतिया से चुनाव लड़ने के अपने फैसले पर संजना सिंह ने बेहद भावुक और आध्यात्मिक रुख अपनाते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं दतिया को नहीं चुना है, बल्कि दतिया की अधिष्ठात्री देवी "मां पीतांबरा ने मुझे दतिया की जनता की सेवा के लिए चुना है।" उनका मानना है कि यह चुनाव केवल एक साधारण विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण किन्नर समाज के सम्मान, राजनैतिक भागीदारी और उनके सुरक्षित भविष्य की एक निर्णायक लड़ाई है।


"मेरा अपना न तो कोई निजी परिवार है और न ही कोई उत्तराधिकारी। इसलिए राजनीति मेरे लिए किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत लाभ या संपत्ति अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से जनसेवा का एक पवित्र रास्ता है। किन्नर समाज ने सदियों से समाज से केवल स्नेह और सम्मान पाया है, और अब समय आ गया है कि मैं एक जनप्रतिनिधि बनकर जनता का यह ऋण पूरी ईमानदारी से चुकाऊं।"

— संजना सिंह, महामंडलेश्वर व प्रत्याशी


उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि नौकरी में रहकर वे केवल अपना व्यक्तिगत जीवन सुरक्षित कर सकती थीं, लेकिन संपूर्ण समाज के उत्थान और नीतिगत स्तर पर बड़े बदलाव लाने के लिए उनका सार्वजनिक और राजनैतिक जीवन में आना बेहद अनिवार्य था।


'भयमुक्त दतिया' और 'सामाजिक समरसता' प्रमुख चुनावी एजेंडा

संजना सिंह ने दतिया की जनता के सामने अपनी प्राथमिकताओं को रखते हुए स्पष्ट किया कि उनका सबसे पहला और मुख्य उद्देश्य 'भयमुक्त दतिया' का निर्माण करना है, ताकि क्षेत्र का प्रत्येक नागरिक बिना किसी बाहरी डर, आतंक या राजनैतिक दबाव के स्वतंत्र रूप से अपने लोकतांत्रिक मताधिकार का प्रयोग कर सके। इसके साथ ही उन्होंने दतिया के सर्वांगीण विकास, बुनियादी सुविधाओं की बहाली, सामाजिक समरसता और हाशिए पर खड़े अंतिम व्यक्ति के अधिकारों को अपना मुख्य चुनावी एजेंडा घोषित किया है।


देश भर के संत और किन्नर उस्ताद दतिया में डालेंगे डेरा

संजना सिंह के चुनावी समर में उतरने के बाद दतिया में देश भर के साधु-संतों का जमावड़ा लगने जा रहा है। संजना सिंह ने बताया कि उनके चुनाव प्रचार को गति देने के लिए केवल स्थानीय किन्नर समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन संत समाज भी सड़कों पर उतरेगा। आने वाले दिनों में देश के कोने-कोने से विभिन्न किन्नर अखाड़ों के पूज्य संत, महामंडलेश्वर और बड़े उस्ताद उनके समर्थन में जनसंपर्क करने दतिया पहुंचेंगे। उन्होंने साफ कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य केवल चुनावी जीत हासिल करना नहीं, बल्कि रूढ़िवादी सामाजिक सोच को बदलना और विकास का एक नया संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।