भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल मानसूनी बारिश का आंकड़ा अब तक संतोषजनक नहीं रहा है। राज्य में अब तक औसतन 15.4 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जो कुल बारिश के कोटे की आधी भी नहीं है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, राजधानी भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत प्रदेश के 42 जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है।


बारिश के आंकड़े: प्रदेश में 15% कम गिरा पानी

मौसम विभाग के अनुसार, जून और जुलाई के महीनों में मानसूनी ब्रेक के चलते बारिश का कुल आंकड़ा पिछड़ गया है:

प्रदेश में अब तक औसतन 15.8 इंच (401.9 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 18.5 इंच (470.5 मिमी) पानी गिर जाना चाहिए था। इस प्रकार प्रदेश में अब तक 15 प्रतिशत (लगभग 2.7 इंच) कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 19 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।


जिलों में बारिश का वितरण

प्रदेश में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है:

42 जिलों में औसत से कम बारिश: अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, सागर, सतना, ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, रायसेन, रतलाम, मुरैना, नर्मदापुरम और विदिशा सहित 42 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे चल रहा है।

13 जिलों में औसत से अधिक बारिश: मऊगंज, उमरिया, शहडोल, टीकमगढ़, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, राजगढ़ और सीहोर में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है।


48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट नहीं, 5 अगस्त से बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में मानसून टर्फ (Monsoon Trough) और दो अन्य मौसम प्रणालियां एक्टिव हैं, लेकिन वे ज्यादा मजबूत (Strong) नहीं हैं। सिस्टम के कमजोर होने के कारण पिछले 2 दिनों से भारी बारिश थमी हुई है और अगले 2 दिनों तक भी किसी बड़े 'हैवी रेन अलर्ट' की संभावना नहीं है। प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। 4 अगस्त से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 5 अगस्त से प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है।


खेती-किसानी पर असर: सोयाबीन के लिए मौसम अनुकूल, धान को पानी का इंतजार

बारिश की असमानता का सीधा असर प्रदेश की फसलों पर देखने को मिल रहा है:

शाजापुर के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इंदौर-उज्जैन संभाग में हो रही हल्की और रुक-रुक कर बारिश सोयाबीन की फसल के लिए फिलहाल एकदम ठीक है। हालांकि, बाद में दाना भरते समय फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होगी। खंडवा, खरगोन और बड़वानी क्षेत्र में पिछले दिनों हुई भारी बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, जिन क्षेत्रों में धान की बुवाई हुई है, वहां अभी भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं गिरा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।