पन्ना, अमित सिंह । जिले में सरकारी धान के रखरखाव और भंडारण में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। बड़ागांव और लक्ष्मीपुर खरीदी केंद्रों पर किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। बारिश और समय पर सुरक्षित भंडारण नहीं होने के कारण कई बोरियों में धान सड़ गया है, जबकि कुछ स्थानों पर अनाज से पौधे तक उगने लगे हैं।
खरीदी केंद्रों पर धान की यह स्थिति सरकारी भंडारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के बाद उसके सुरक्षित रखरखाव और भंडारण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों को सौंपती है। इसके बावजूद बड़ागांव और लक्ष्मीपुर केंद्रों पर बड़ी मात्रा में धान खुले में पड़ा रहने से शासन को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते धान का उठाव कर सुरक्षित गोदामों में पहुंचा दिया जाता तो सरकारी अनाज की ऐसी दुर्दशा नहीं होती। बारिश के पानी और नमी की चपेट में आने के बाद अब स्थिति यह है कि कई जगह बोरियों में रखा धान खराब हो चुका है और उसमें अंकुरण होने लगा है।
मामला सामने आने के बाद खाद्य विभाग भी हरकत में आया है। पन्ना के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि धान खराब होने संबंधी शिकायत और जानकारी विभाग के संज्ञान में आई है। मामले की विभागीय स्तर पर जांच कराई जाएगी। जांच में जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अनाज की इस बर्बादी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों से जनता के टैक्स के पैसों से खरीदे गए हजारों क्विंटल धान को समय पर सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? धान के उठाव और भंडारण में देरी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि लापरवाही से हुए लाखों रुपये के संभावित नुकसान की भरपाई किससे की जाएगी?




