जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) में न्यायाधीशों की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सोमवार को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) की उच्च स्तरीय बैठक में सात अधिवक्ताओं को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।
38 से बढ़कर 45 होगी जजों की संख्या
वर्तमान में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ (जबलपुर) और दो खंडपीठों (इंदौर व ग्वालियर) को मिलाकर कुल 38 न्यायाधीश कार्यरत हैं: एमपी हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 स्वीकृत पद हैं। कॉलेजियम द्वारा मंजूर की गई सातों नियुक्तियों की औपचारिक प्रक्रिया (केंद्र सरकार की अधिसूचना व राष्ट्रपति की मंजूरी) पूरी होने के बाद हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी। सातों नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के बावजूद हाईकोर्ट में 8 पद रिक्त बने रहेंगे।
कहां से चुने गए हैं नए न्यायाधीश?
कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित सात वकीलों/अधिवक्ताओं में राज्य के अलग-अलग हिस्सों और उच्चतम न्यायालय के वकील शामिल हैं:
जबलपुर: 3 अधिवक्ता
इंदौर: 2 अधिवक्ता
ग्वालियर: 1 अधिवक्ता
नई दिल्ली: 1 अधिवक्ता
मुकदमों के जल्द निपटारे की उम्मीद
हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने से न्यायिक कामकाज को गति मिलने की पूरी संभावना है। हालांकि, विधि विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि लंबित मामलों के तेजी से निपटारे पर इसका वास्तविक असर मुकदमों की बढ़ती संख्या, कार्यभार और अन्य प्रशासनिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिर भी, नए जजों के आने से आम जनता को त्वरित न्याय मिलने में सहूलियत होगी।













