पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से आदिवासियों और दलितों की बेशकीमती जमीनों की सुनियोजित लूट और धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल पन्ना के रानीगंज निवासी अवधेश उर्फ खुन्ना त्रिवेदी और उसके बेटे अंकुर त्रिवेदी पर करीब 40 से अधिक आदिवासी परिवारों की लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की पुश्तैनी व सरकारी पट्टे की जमीनों को हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं। तीन दर्जन से अधिक आपराधिक प्रकरण, जिला बदर और एनएसए जैसी कार्यवाहियों के बावजूद इस पिता-पुत्र की जोड़ी पर राजनीतिक संरक्षण और गुंडागर्दी के दम पर जमीनों का अवैध साम्राज्य खड़ा करने के आरोप लग रहे हैं। पन्ना की विशेष अदालत में चल रहे मुकदमों और प्रशासनिक दस्तावेजों में दर्ज शिकायतों से इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली की परतें खुल रही हैं। पन्ना जिले में लगभग 40 से ज्यादा आदिवासी और दलित परिवार इन बाप-बेटे की जोड़ी से परेशान हैं।


हम बात कर रहे हैं 70 वर्षीय अवधेश उर्फ खुन्ना त्रिवेदी की, जो कि पन्ना के रानीगंज इलाके का रहने वाला है। खुन्ना त्रिवेदी का खौफ पूरे पन्ना में पसरा है। थानों के पंचनामे इनके गुनाहों से भरे पड़े हैं। पिछले 25 सालों में खुन्ना त्रिवेदी पर अलग-अलग थानों में लगभग तीन दर्जन मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। वहीं खुन्ना का पुत्र अंकुर त्रिवेदी भी लगभग एक दर्जन मुकदमों में शामिल रह चुका है। चाल, चरित्र और चेहरे का दावा करने वाली एक राजनैतिक पार्टी ने ऐसे विवादित व्यक्ति को पन्ना जिले का संगठन उपाध्यक्ष बनाया था लेकिन जब अंकुर त्रिवेदी ने पन्ना जिले के ही नेताओं को धमकाना शुरू कर दिया और कुछ वायरल वीडियो सामने आए तो इसे पद से हटा दिया गया। अवधेश उर्फ खुन्ना त्रिवेदी और उसके बेटे अंकुर त्रिवेदी के इस काले कारनामे में दो महिलाएं भी शामिल रही हैं अवधेश त्रिवेदी की मां सुमिला त्रिवेदी और अंकुर त्रिवेदी की पत्नि कीर्ति त्रिवेदी।


प्राप्त जानकारी और सरकारी दस्तावेजों में दर्ज शिकायतों की गवाही को सच माने तो यह जोड़ी पन्ना जिले में अब तक लगभग 100 करोड़ रूपए से ज्यादा की आदिवासी परिवारों की जमीनें और सरकारी जमीनें हथिया चुकी है। जिला बदर और एनएसए जैसी कार्यवाहियां होती रहीं। मुकदमे दर्ज होते रहे, लेकिन बेतहाशा लूट और ठगी का यह सिलसिला कभी नहीं थमा। कभी राजनैतिक रसूख के बल पर तो कभी गुंडई के बलबूते पर इन बाप-बेटों ने पन्ना जिले में अकूत दौलत इकट्ठी कर ली। आज इसी का कच्चा चिट्ठा उजागर करते हैं।


वर्ष 2021-22 में दर्ज इस शिकायत में एक आदिवासी जिसका नाम दारा गौड़ है वह गुहार लगाता है। शिकायत में कहा गया है कि अवधेश त्रिवेदी और अंकुर त्रिवेदी ने धोखाधड़ी के माध्यम से उसे सरकारी पट्टे पर मिली जमीन को हड़प लिया। हड़पने का तरीका भी नायाब रहा, पहले आरोपियों ने अपने यहां मजदूर रहे हीरालाल गौड़ के नाम पर उनकी जमीनों को दर्ज कराया और फिर हीरालाल गौड़ से यह जमीन अंकुर त्रिवेदी, अवधेश त्रिवेदी और सुमिला त्रिवेदी के नाम चली गई। आदिवासी परिवार से ही जुड़ा एक दूसरा मामला भी सुन लीजिए। पन्ना की ही भूमि खसरा नं. 1211 वर्ष 1955-56 से 2011-12 तक आदिवासी नंदुआ के पक्ष में दर्ज थी। बाद में त्रिवेदी परिवार के ही मजदूर हीरालाल गौड़ के नाम पर झूठी संपत्ति के रूप में दस्तावेज बनाकर दर्ज कराई गई और वर्ष 2019-20 में इस भूमि का स्वामित्व अंकुर त्रिवेदी के पक्ष में कर दिया गया। इसी तरह का एक और मामला है भूमि संख्या 239 और 260 का। वर्ष 1955-56 से 2011-12 तक इस खसरा नंबर की जमीन आदिवासी गोखा के पक्ष में दर्ज थी। बाद में इसका नामांतरण हीरालाल गौड़ के पक्ष में किया गया और 2019 के एक आदेश के तहत इस भूमि का हस्तांतरण अंकुर त्रिवेदी के पक्ष में कर दिया गया। एक और मामला आदिवासी रामउसार का है। भूमि संख्या 24/2 को भी इसी तरह पहले हीरालाल गौड़ और बाद में अंकुर त्रिवेदी के पक्ष में लाया गया। जैसे सारी नदियां घूम फिरकर समंदर की तरफ जाती हैं उसी तरह पन्ना जिले में रहने वाले लगभग 40 आदिवासी परिवारों की जमीनें हीरालाल गौड़ से होते हुए अवधेश त्रिवेदी और अंकुर त्रिवेदी के काले समंदर में दफन हो जाती हैं।


भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष का पद सुशोभित कर चुके अंकुर त्रिवेदी का राजनैतिक रसूख और उनके पिता का जुर्म से जुड़ा इतिहास उन्हें हमेशा बचाता रहा। ऐसा नहीं है कि कभी किसी अधिकारी ने जिगरा नहीं दिखाया। पन्ना में एक आईएएस अधिकारी शेर सिंह मीणा बतौर एसडीएम पदस्थ हुए थे। शेर सिंह मीणा ने इन बाप-बेटे के होश ठिकाने लगाए थे, दोनों से जुड़े आदिवासियों की जमीनें हड़पने के लगभग आधा दर्जन मामलों में गहरे साक्ष्य इकट्ठे किए गए और उन साक्ष्यों के आधार पर इन आदिवासियों की जमीनों को वापस उन्हें लौटाने के आदेश शेर सिंह मीणा ने किए थे। इतना ही नहीं इन बाप-बेटे पर धारा 420 का मुकदमा भी दर्ज कराया गया था लेकिन एक बड़े नेता के इशारे पर एसडीएम शेर सिंह मीणा का तबादला हो गया और फिर एसडीएम न्यायालय से जारी किया गया यह फरमान एक कलेक्टर ने बदल दिया।


हालांकि इस बाप-बेटे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे कुछ आदिवासी अभी रूके नहीं, हारे नहीं और उन्होंने अपनी जान को दांव पर लगाकर इस लड़ाई को जारी रखा है। जब भाजपा ने इन अपराधियों को संरक्षण दिया तो आदिवासी कांगे्रस की शरण में गए। नेता प्रतिपक्ष और आदिवासियों के नेता उमंग सिंघार से शिकायत हुई तो उन्होंने इस मामले में विधानसभा प्रश्न लगवाया। लेकिन प्रश्न का जवाब तो उन्हीं कलेक्टर महोदय को लिखना था जो पहले ही नेताओं के दबाव में इन नंबरी बाप-बेटे के इशारे पर नाच रहे थे। हालांकि सत्य कभी हारता नहीं। ये मामला पन्ना के विशेष न्यायालय में अब भी विचाराधीन है जहां से कुछ दिनों में फैसला आने की उम्मीद है। इस मामले में लड़ाई लड़ रहे देबू गौड़ बताते हैं कि ये बाप-बेटे 100 करोड़ रूपए से ज्यादा की आदिवासी परिवारों की जमीन हड़प चुके हैं और जब कोई इनके खिलाफ सिर उठाता है तो अपने राजनैतिक रसूख के बल पर उसके खिलाफ की षडयंत्र रचने लगते हैं।


देबू गौड़ ने बताया कि इन लोगों ने उसकी नौकरीशुदा बहिन को भी नहीं छोड़ा और उसके खिलाफ भी झूठी शिकायतें कर दबाने, झुकाने का प्रयास करते रहे। ये पिता-पुत्र न्यायालय में चल रहे मामले के बीच भी पीडि़त पक्ष को धमका रहे हैं, उन्हें मामला वापस लेने का भय दिखा रहे हैं। इसी बात से घबराकर ये परिवार अब अपने प्रदेश के आला अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, पड़ोसी जिले के अधिकारियों और मीडिया से गुहार लगा रहा है। परिवार ने भाजपा के क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा से भी पत्र लिखकर गुहार लगाई है लेकिन फिलहाल इन परिवारों की मदद कोई नहीं कर रहा। उनकी मांग है कि कि आदिवासियों की करोड़ों रूपए की जमीनों को वापस दिलाया जाए, अवधेश त्रिवेदी उर्फ खुन्ना उसके बेटे अंकुर त्रिवेदी, उनकी पत्नि सुमिला त्रिवेदी और इसी गिरोह के एक सदस्य जिसे की अचानक से राज खुलने के डर से गायब कर दिया गया हीरालाल गौड़ को खोजकर इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए।