नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों और जोखिमों के नकारात्मक प्रभाव को कम करने वाले नीतिगत हस्तक्षेपों से सहारा मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपने अक्टूबर 2026 के मासिक बुलेटिन में यह जानकारी दी। केंद्रीय बैंक ने कहा कि उद्योग और सेवा क्षेत्र के उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों से स्पष्ट है कि घरेलू अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है। ऊर्जा का शुद्ध आयातक होने के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि को निरंतर घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से समर्थन मिला है।
आरबीआई बुलेटिन में कहा गया, "खुदरा महंगाई में पिछले कुछ महीनों के दौरान मामूली बढ़ोतरी हुई है और विभिन्न वस्तुओं में महंगाई के अधिक व्यापक होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में मौद्रिक नीति के रुख में उसी के अनुरूप बदलाव की जरूरत है। विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने कई नियामकीय उपाय भी किए हैं, जिनके जरिए बाहरी चुनौतियों से निपटा जा रहा है।"
बुलेटिन के अनुसार, एफसीएनआर (बी) स्वैप सुविधा के तहत मजबूत पूंजी प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिली। वहीं, अगस्त में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और रेमिटेंस का प्रवाह मजबूत हुआ। निर्यात में मजबूत वृद्धि के चलते सितंबर में व्यापार घाटा कम हुआ।
मासिक दस्तावेज के अनुसार, सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह खाद्य पदार्थों, ईंधन और कोर महंगाई के घटकों में व्यापक वृद्धि रही।
बुलेटिन में कहा गया, "वित्त वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों के दौरान वस्तुओं के निर्यात में दोहरे अंकों की वृद्धि से व्यापार घाटा कम करने में मदद मिली। अगस्त में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और प्रेषण का प्रवाह मजबूत हुआ। एफसीएनआर (बी) स्वैप सुविधा के तहत मजबूत पूंजी प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई।"
आरबीआई ने कहा कि आपूर्ति पक्ष की बात करें तो विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत गति से वृद्धि हुई, जबकि घरेलू और विदेशी मांग में तेजी के कारण सेवा क्षेत्र की गतिविधियां और मजबूत हुईं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और असमान वितरण के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो गई और कुल बुवाई क्षेत्र सामान्य स्तर से अधिक रहा।
बुलेटिन में कहा गया कि अक्टूबर की शुरुआत तक दबाव में रहने के बाद भारतीय रुपए में मजबूती आई। विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों के बाद रुपए को समर्थन मिला।
अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) गतिविधियों में मजबूती आई। इस दौरान पंजीकरण और शुद्ध पूंजी प्रवाह, दोनों में पिछले वर्ष की तुलना में सुधार दर्ज किया गया। बुलेटिन के अनुसार, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के समर्थन से बाहरी क्षेत्र की संवेदनशीलता से जुड़े संकेतक नियंत्रण में बनेरहे।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक झटकों का अच्छी तरह सामना किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान जुलाई के अनुमान से 60 आधार अंक बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ ने इसके पीछे उम्मीद से बेहतर आर्थिक गति, मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की दमदार गतिविधियों को प्रमुख कारण बताया है।
















