पटना। बिहार में एमएलसी चुनावों के नतीजों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) ने कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन पर निशाना साधा। एनडीए के नेताओं ने कहा कि जनता ने विपक्ष को नकार दिया है, लेकिन इसके बाद भी विपक्ष को कुछ समझ नहीं आ रहा है। पार्टी को अपनी राजनीतिक रणनीति पर आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए विपक्षी चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी मांगों पर भी सवाल उठाए।बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एमएलसी चुनावों में एनडीए के प्रदर्शन पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है और पिछली बार की तुलना में अधिक सीटें जीती हैं। इन नतीजों से स्पष्ट होता है कि जनता का समर्थन भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सरावगी ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद अलग-अलग तरह के तर्क देता है। जब विपक्ष चुनाव हार रहा था, तब भी वह ईवीएम को सही बताता था और अब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में हार के बाद भी उसके बयान विरोधाभासी हैं।
उन्होंने कहा कि जनता ने विपक्षी दलों को उनके कामकाज के आधार पर नकार दिया है। ऐसे में विपक्ष को चुनाव परिणामों से जुड़े सवाल उठाने के बजाय जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने एमएलसी चुनावों के नतीजों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके इंडी गठबंधन के सहयोगियों को प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए।
राजीव रंजन ने कहा कि कांग्रेस लगातार ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है, लेकिन बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि चार राज्यों में विधान परिषद और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 28 सीटों पर हुए चुनावों में नागपुर ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर कांग्रेस को कहीं भी सफलता नहीं मिली।
राजीव रंजन ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी को चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय जनहित से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को आत्ममंथन करने और पार्टी की खराब स्थिति के कारणों पर विचार करने की सलाह दी।
1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली को लेकर भी जदयू नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा। राजीव रंजन ने रैली से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि विपक्ष को भी पता है कि इस आयोजन से उसे कोई बड़ी राजनीतिक सफलता मिलने की उम्मीद नहीं है।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर करने के विपक्षी कदमों का उल्लेख किया। राजीव रंजन ने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष न्यायिक और संसदीय प्रक्रियाओं का सहारा ले रहा है, तो सड़कों पर अराजकता फैलाने की कोशिशों को किस नजरिये से देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे न्यायपालिका की अवमानना और संसद के प्रति अविश्वास जैसे सवालों से जोड़कर पेश किया।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि 28 सीटों पर हुए चुनावों में एनडीए ने 16 सीटों पर जीत हासिल की है। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने कर्नाटक और बिहार में अपनी मौजूदा सीटें गंवा दी हैं।
संजय झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी का समर्थन करते हुए सवाल किया कि जब चुनाव बैलेट पेपर से हुए और जनता ने कांग्रेस को नकार दिया तो अब पार्टी अपनी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता के बीच अपने समर्थन का आकलन करना चाहिए।
1 नवंबर की रैली को लेकर झा ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों की बयानबाजी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी नेता प्रधानमंत्री को जनता से मिल रहे जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसी वजह से कांग्रेस के साथ ऐसे तत्व जुड़ रहे हैं, जो देश में अराजकता की स्थिति पैदा करना चाहते हैं।

















