गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दो दिवसीय दौरे के दौरान शुक्रवार को बनासकांठा जिले में कुल 407.56 करोड़ रुपये की लागत वाली बनास डेयरी की तीन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। साथ ही, वे थराद और राधनपुर में दो बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला भी रखेंगे।जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाना है, उनमें भिल्डी में स्थित 'भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर' शामिल है, जिसे 324.77 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा, सनादार में 51.65 करोड़ रुपये की लागत से बना 'फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट' और पालनपुर में 31.14 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 'ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम' भी शामिल हैं।
बाद की इन दो सुविधाओं का उद्घाटन वर्चुअल तरीके से किया जाएगा। 127 एकड़ में फैले इस सेंटर में पशु प्रजनन के लिए एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में काम करेगा, जिसका मुख्य फोकस आनुवंशिक सुधार और नवाचार पर होगा।
केंद्र सरकार के 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' के तहत, इस सुविधा के लिए 38.83 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिसमें डोनर पशुओं के लिए 2 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है। इस केंद्र को 'नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड' से तकनीकी सहायता भी मिल रही है।
इस परियोजना को 'एनिमल हसबेंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड' योजना के तहत मंजूरी दी गई है और इसे नाबार्ड से वित्तीय सहायता प्राप्त है। पालनपुर में स्थित एएसआरएस सुविधा को बनास डेयरी द्वारा विकसित किया गया है, जिसका उपयोग अल्ट्रा-हाई-टेम्परेचर डेयरी उत्पादों के स्वचालित भंडारण और डिस्पैच के लिए किया जाता है।
इसके नौ-स्तरीय स्टील-रैक सिस्टम में 11,000 पैलेट रखे जा सकते हैं। इसे वेयरहाउसिंग कार्यों की गति, ट्रेसेबिलिटी और दक्षता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
डेयरी द्वारा खुद विकसित किए गए इस सिस्टम से लागत कम करने में मदद मिली है। इससे होने वाली अतिरिक्त आय का लाभ इसके 4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों को मिल रहा है। इस सुविधा का उपयोग अन्य डेयरी उत्पादों को स्टोर करने के लिए भी किया जा सकता है।
देवदार तालुका के सनादार में स्थित फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट को 51.65 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इसकी उत्पादन क्षमता को प्रति घंटे 2 टन से बढ़ाकर 5 टन करने का काम इस साल अप्रैल में शुरू हुआ था। बनास डेयरी ने फ्रेंच फ्राइज के लिए एक एकीकृत उत्पादन श्रृंखला तैयार की है। इसमें प्रयोगशालाओं में पौधों का विकास, बीजों की खेती, कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण और उपभोक्ताओं के लिए प्रोसेसिंग तक की प्रक्रियाएं शामिल हैं। प्रोजेक्ट के विवरण के अनुसार, सहकारी संस्था ने इन सभी चरणों को मिलाकर एक एकीकृत प्रणाली तैयार की है। भारत में किसी अन्य सहकारी संगठन या एजेंसी के पास फिलहाल ऐसा मॉडल मौजूद नहीं है।
प्रधानमंत्री वर्चुअल माध्यम से दो बायो-सीएनजी प्लांट की आधारशिला भी रखेंगे। इनमें से एक प्लांट थराद में होगा, जिसकी क्षमता 75 मीट्रिक टन गोबर को प्रोसेस करने की है, और दूसरा राधनपुर में होगा, जिसकी क्षमता 100 मीट्रिक टन है।
बनास डेयरी पहले से ही चार प्लांट चला रही है, जहां गोबर को प्रोसेस करके वाहनों के लिए बायो-सीएनजी और जैविक खाद बनाई जाती है।
इन दो नई सुविधाओं से स्वच्छ ऊर्जा और खाद के उत्पादन में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे पशुपालकों को गोबर का उपयोग करके आय का एक अतिरिक्त जरिया भी मिलेगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विधानसभा अध्यक्ष और बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी शामिल होंगे।
















