भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को करीब तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद अपना नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल स्थित राजभवन (लोकभवन) में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें शपथ दिलाई।
जस्टिस कोगजे एमपी हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं। इससे पहले जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास में नए चीफ जस्टिस के सम्मान में मध्याह्न भोजन (लंच) का आयोजन किया गया। वे शुक्रवार से जबलपुर स्थित हाईकोर्ट मुख्यपीठ में आधिकारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण करेंगे।
गुजरात में वकालत से सफर की शुरुआत, गोधरा दंगों में की थी पैरवी
16 जुलाई 1969 को जन्मे जस्टिस ए. वाई. कोगजे ने 1990 में रसायन शास्त्र (Chemsitry) में बीएससी और 1993 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उसी वर्ष उन्होंने गुजरात में वकालत की शुरुआत की थी।
उनके 33 वर्षों के कानून और न्याय व्यवस्था के लंबे सफर की प्रमुख उपलब्धियां
- आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ: 2001 में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रहे। 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स विभाग के स्टैंडिंग काउंसल बने।
- संवेदनशील मुकदमों का संचालन: 2011 में SIT और STF के विशेष वकील नियुक्त हुए। उन्होंने 2002 के बहुचर्चित गोधरा दंगों से जुड़े कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रखा।
- न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति: 6 अप्रैल 2016 को वे गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 31 अगस्त 2026 को की गई सिफारिश के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रपति की मंजूरी से उनकी नियुक्ति एमपी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर हुई है। वे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे, इस लिहाज से मध्य प्रदेश में मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल लगभग 4 वर्ष और 10 महीने का रहेगा।
कस्टोडियल डेथ से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, दिए कई कड़े व ऐतिहासिक फैसले
जस्टिस कोगजे को कड़े और न्यायसंगत फैसलों के लिए जाना जाता है। गुजरात हाईकोर्ट में जज रहते हुए उन्होंने कई बड़े निर्णय दिए:
- पत्नी की हत्या के आरोपी की जमानत खारिज (2024): अपनी ही मृत पत्नी के शव के अवशेषों को छिपाने, जांच गुमराह करने और फर्जी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाने वाले पति को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था।
- कस्टोडियल डेथ पर सख्त रुख (2022): कस्टडी में प्रताड़ना और मौत के आरोपी ग्राम रक्षक दल के जवान को जमानत देने से इनकार करते हुए पुलिस बर्बरता पर सख्त टिप्पणियां की थीं।
- जल निकायों और पर्यावरण की सुरक्षा (2024): जल निकायों में अंधाधुंध लैंड फिलिंग (भराव) पर चिंता जताते हुए कहा था कि झीलों व तालाबों के विनाश से पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीव बफर जोन बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
- कर्मचारियों के अधिकार (2022): औद्योगिक विवाद अधिनियम की व्याख्या करते हुए लंबे समय तक काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था।




