मिल्वौकी। पोलैंड ने जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में कृषि उत्पादों के व्यापार को 'हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने' पर चिंता जताई। पोलैंड का कहना है कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध और काला सागर के रास्ते व्यापार में आई रुकावट ने दुनिया में खाने-पीने की चीजों की सप्लाई को प्रभावित किया है और यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है।
पोलैंड के वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की ने बैठक से अलग आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि यह मुद्दा उनके देश के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
जी20 देशों की बैठक में चर्चा किए गए मुख्य मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर डोमान्स्की ने कहा, "आज हमने कृषि उत्पादों के व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने के मुद्दे पर चर्चा की।"
उन्होंने कहा, "पोलैंड के लिए यह बेहद अहम मुद्दा है, क्योंकि हम देख रहे हैं कि यूक्रेन पर रूस के क्रूर और बिना उकसावे के हमले की वजह से यूक्रेन से कृषि उत्पादों के व्यापार में बहुत बड़ी रुकावट आई है।"
डोमान्स्की ने कहा कि काला सागर के व्यापारिक रास्तों में आई रुकावट का असर सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं है। इससे दूसरे देशों में खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि काला सागर की यह नाकेबंदी कुछ देशों में खाने-पीने की चीजों तक पहुंच को काफी हद तक प्रभावित कर रही है। इससे यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है।
डोमान्स्की ने कहा कि पोलैंड ने अमेरिका में हुई जी20 की बैठक का इस्तेमाल रूस की कार्रवाई की निंदा करने के लिए किया। उन्होंने कहा, "रूस के इस कदम की निंदा की जानी चाहिए और पोलैंड ने यहां अमेरिका में यही किया।"
जी20 की चर्चाओं में भारत की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर डोमान्स्की ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक लीडर है। भारत न सिर्फ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, बल्कि उसकी जीडीपी ग्रोथ भी काफी तेज है। स्थिर व्यापारिक रिश्तों की अहमियत पर बात करते हुए डोमान्स्की ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि लोकतांत्रिक देशों के साथ व्यापार करना आसान होता है। लोकतांत्रिक देशों के साथ कारोबार करना भी अक्सर आसान होता है।"













