छतरपुर। कलेक्टर मृणाल मीना की अध्यक्षता में हाल ही में जिला अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक (एसपी) रजत सकलेचा, जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया और एडीएम विनय द्विवेदी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान जिले में सड़क हादसों को रोकने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम और सुरक्षा इंतजाम
बैठक का मुख्य ध्यान जिले की सड़कों को सुरक्षित बनाने पर रहा। कलेक्टर ने जिले के 18 चिन्हित बेहद खतरनाक रास्तों (रेड स्पॉट) पर तुरंत सुरक्षा इंतजाम करने और मरम्मत का काम शुरू करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए।
इसके साथ ही, एक बड़ी उपलब्धि पर अधिकारियों की सराहना भी की गई। जिले की 9 अत्यधिक दुर्घटना संभावित जगहों (ब्लैक स्पॉट) पर साल 2026 में एक भी सड़क हादसा नहीं दर्ज किया गया। सड़क सुरक्षा के इस मॉडल और हादसों में कमी लाने के मामले में छतरपुर जिला पूरे मध्य प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा है।
निर्माण विभागों और नगर पालिका को सड़क सुधार के निर्देश
कलेक्टर ने एनएचएआई (NHAI), पीडब्ल्यूडी (PWD) और एमपीआरडीसी (MPRDC) को सड़कों की हालत सुधारने के सख्त निर्देश दिए।
- एनएचएआई: संभावित दुर्घटना स्थलों पर दिशा-सूचक साइन बोर्ड, पर्याप्त रोशनी (लाइटिंग) और गड्ढों (पेंच वर्क) की मरम्मत कराए।
- लोक निर्माण विभाग (PWD): सलैया क्षेत्र में सड़क की मरम्मत करे, सागर रोड पर दो स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए और क्रिश्चियन स्कूल के पास गाड़ियो की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए।
- नगर पालिका: सड़कों के बीच में उगी झाड़ियों और पेड़ों की छंटाई करे। साथ ही, चौड़े फुटपाथों पर दुकानों द्वारा किए गए अवैध कब्जों (अतिक्रमण) को हटाकर सड़कों को गाड़ियों के चलने लायक चौड़ा बनाए।
- इसके अलावा, राज्य शासन की 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना' के तहत जिले में नए बस स्टैंड और बस डिपो के निर्माण के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं।
गंभीर अपराध, नारकोटिक्स और मेडिकल स्टोरों की जाँच
बैठक में जिले के संवेदनशील आपराधिक मामलों और नशे (नारकोटिक्स) से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा भी की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों में पुलिस और प्रशासन कड़ी निगरानी रखे और अदालत में समय पर ठोस सबूत प्रस्तुत करे ताकि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने ड्रग इंस्पेक्टर को जिले के सभी मेडिकल स्टोरों की भौतिक जाँच करने के आदेश दिए। जाँच के दौरान यह देखा जाएगा कि मेडिकल स्टोर उसी स्थान पर चल रहा है या नहीं, जिसके लिए लाइसेंस जारी किया गया था। साथ ही, मेडिकल स्टोरों पर बिकने वाली एक्सपायरी (तारीख निकल चुकी) दवाइयों, नशीले कफ सिरप और किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि की गहनता से जाँच की जाएगी। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित स्टोर पर तुरंत नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













