तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि 40 दिन तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के तेल, रिफाइनरी और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों से गंभीर पर्यावरणीय खतरे पैदा हो गए हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, तेहरान में आयोजित 'इकोसाइड, ए साइलेंट वॉर क्राइम' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अराघची ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने भी इसकी पुष्टि की है कि इन हमलों के बाद लगी आग और हाइड्रोकार्बन पदार्थों के जलने से खतरनाक रासायनिक तत्व वातावरण में फैल गए।
उन्होंने कहा कि ये प्रदूषक हवा के जरिए मिट्टी और पानी तक पहुंच सकते हैं और यहां तक कि खाद्य श्रृंखला में भी प्रवेश कर सकते हैं। उनका असर हमले के समय और स्थान से कहीं अधिक समय तक बना रह सकता है।
अराघची ने गाजा और लेबनान में सैन्य हमलों से पर्यावरण को हुए गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले नुकसान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून को युद्ध के दौरान पर्यावरण और मानवाधिकारों को होने वाले नुकसान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तुरंत ईरान में अपनी सैन्य भागीदारी समाप्त कर सकता है, लेकिन वह ऐसा तब तक नहीं करेगा जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि तेहरान भविष्य में कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि सात महीने से चल रहा संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है।
टेनेसी में एक चुनावी रैली से लौटने के बाद जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "हम अभी वहां से निकल सकते हैं, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में उनके पास परमाणु हथियार न हों। और हम इसे सुनिश्चित करेंगे।"
जब उनसे पूछा गया कि अमेरिकी सैन्य अभियान के कारण ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने का दावा करने के बाद भी वह जीत की घोषणा क्यों नहीं कर रहे हैं तो ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में यह खतरा फिर से पैदा न हो।
उन्होंने कहा, "क्योंकि मुझे इसे उसी तरह बनाए रखना है। मैं नहीं चाहता कि दो साल बाद फिर यही स्थिति पैदा हो। हमें इसकी गारंटी चाहिए कि भविष्य में उनके पास परमाणु हथियार न हों।"
ट्रंप की यह टिप्पणी टेनेसी के क्लार्क्सविल में दिए गए उनके भाषण के बाद आई, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही उन्होंने संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों का भी जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका लगभग सात महीने से इस संघर्ष में शामिल है। उन्होंने इसकी तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों से की।
उन्होंने कहा, "अब ईरान में हम सात महीने से मौजूद हैं।" इसके बाद उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में 18 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे गए हैं।
ट्रंप ने अपने समर्थकों से कहा, "हमारे सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन हमने उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है।"












