नई दिल्ली। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपनी तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को बनाए रखने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ पहले लगाए गए अनुमान से अधिक कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता को तैयार करना होगा। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में सीईए प्रमुख ने कहा कि मांग के रुझानों की वजह से नीति निर्मताओं को आने वाले दशक में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयले से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाने के पैमाने पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, सरकार ने पिछले साल अनुमान लगाया था कि 2035 तक देश की कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन क्षमता में 97 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल स्थापित कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता लगभग 307 गीगावाट हो जाएगी।

हालांकि, बिजली की खपत में उम्मीद से ज्यादा तेजी से हो रही बढ़ोतरी भविष्य की जरूरतों को काफी बढ़ा सकती है।

प्रसाद ने कहा, "मांग बढ़ रही है और जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, हमें उस मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के स्थिर स्रोतों की जरूरत है।"

प्रसाद के अनुसार, कोयले से चलने वाली अतिरिक्त क्षमता की जरूरतें पहले के अनुमानों से ज्यादा हो सकती हैं और मौजूदा विस्तार योजनाओं के अलावा 105 गीगावाट से 150 गीगावाट तक पहुंच सकती हैं।

उनका यह बयान उस चुनौती को दिखाता है जिसका सामना भारत कर रहा है, क्योंकि देश तेजी से बढ़ती बिजली की खपत और साफ ऊर्जा की ओर बढ़ने के अपने लंबे समय के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

प्रसाद ने कहा कि इस साल बिजली की मांग में काफी तेजी आई है और रोजाना की पीक डिमांड पिछले साल के मुकाबले 45 गीगावाट से 50 गीगावाट ज्यादा रही है।

इसके अलावा, मानसून के मौसम में कम बारिश की वजह से पनबिजली उत्पादन भी कम हुआ है, जिससे सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए थर्मल पावर प्लांट पर निर्भरता बढ़ गई है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे हो गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे ज्यादा स्तर था और यह तब हुआ जब कोयले से चलने वाले पावर प्लांट से बिजली का उत्पादन ज्यादा था।