बीजिंग। मध्य चीन के हनान प्रांत की राजधानी चंगचो में मंगलवार को चीनी राष्ट्रीय वृहद पुरातात्विक स्थल कार्य सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-2025) के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों की समीक्षा की गई। साथ ही, 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के तहत पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण और विकास से जुड़े प्रमुख कार्यों की रूपरेखा भी तय की गई।
चीनी राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत प्रशासन के अनुसार, 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान बड़े पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण और उनके बेहतर उपयोग को राष्ट्रीय भू-स्थानिक योजना में शामिल किया गया। देशभर में मौजूद 3 लाख 30 हजार से अधिक प्राचीन स्थलों और मकबरों में से 150 को प्रतिनिधि स्थलों के रूप में चुना गया।
इस दिशा में राष्ट्रीय पुरातात्विक स्थल उद्यानों ने भी अहम भूमिका निभाई है। 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान संशोधित सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण कानून में इन उद्यानों को शामिल किया गया। इस अवधि में 29 नए राष्ट्रीय पुरातात्विक स्थल उद्यान बनाए गए, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 65 हो गई। इन उद्यानों में 161 पुरातात्विक उत्खनन परियोजनाएं और 336 संरक्षण परियोजनाएं पूरी की गईं। वहीं, इन उद्यानों को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 करोड़ 3 लाख से अधिक रही, जो 13वीं पंचवर्षीय योजना (2016-2020) के मुकाबले लगभग दोगुनी है।
सम्मेलन में भविष्य के कामकाज के लिए चार प्रमुख दिशाएं तय की गईं। इनमें उच्च स्तरीय पुरातात्विक शोध के जरिए प्राचीन सभ्यताओं को समझने की क्षमता बढ़ाना, वैज्ञानिक तरीकों और कानून के माध्यम से स्थलों का लगातार संरक्षण सुनिश्चित करना, बेहतर प्रदर्शनियों के जरिए सांस्कृतिक सेवाओं को मजबूत बनाना और प्रभावी प्रबंधन से इन स्थलों के विकास को गति देना शामिल है।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मिट्टी, ईंट-पत्थर और नम वातावरण वाले पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण की तकनीकों पर शोध किया जाएगा। इसके साथ ही, नुकसान होने से पहले ही स्थलों की सुरक्षा के लिए निवारक संरक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों की मदद से निगरानी व्यवस्था को भी स्मार्ट बनाया जाएगा।
इसके अलावा, जिन राष्ट्रीय पुरातात्विक स्थल उद्यानों का संचालन खराब होगा, जहां संरक्षण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होंगे या शोध कार्य ठप पड़े होंगे, उन्हें चेतावनी दी जाएगी। इसके बावजूद सुधार नहीं होने पर संबंधित उद्यानों को राष्ट्रीय सूची से हटाने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
गौरतलब है कि वृहद पुरातात्विक स्थल केवल बड़े भू-भाग में फैले ऐतिहासिक स्थान नहीं हैं, बल्कि वे किसी सभ्यता के विकास और सांस्कृतिक विरासत को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें प्राचीन बस्तियां, पुराने नगर, महल और मकबरे जैसे स्थल शामिल हैं। ये चीन के दस लाख वर्ष के मानव इतिहास, दस हज़ार वर्ष पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और पांच हज़ार वर्ष से अधिक पुरानी सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)











