सीहोर। सीहोर जिले के कोसमी गांव में रविवार दोपहर वन विकास निगम की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आदिवासी परिवारों के 12 मकानों को ढहा दिया। कार्रवाई के दौरान पीड़ितों के कुएं पूर दिए गए और खेतों में लहलहाती फसलें भी कुचल दी गईं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सांसद व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने कोसमी पहुंचे। शिवराज को देखकर बेघर हुई महिलाएं फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने धरना स्थल पर बैठकर पीड़ितों की पीड़ा सुनी और मौके से ही प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।


जिन घरों में किलकारियां थीं, वहां अब चीखें गूंज रहीं

पीड़ितों की व्यथा सुनकर शिवराज सिंह चौहान भावुक हो गए। उन्होंने कहा, मेरे क्षेत्र में जुल्म और अन्याय की इंतहा हुई है। जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब चीखें सुनाई दे रही हैं। लोगों के वर्षों पुराने आशियाने उजाड़ दिए गए और फसलें रौंद दी गईं। यह कार्रवाई बेहद शर्मनाक और हृदयहीन है, इसे ईश्वर भी माफ नहीं करेगा। ऐसे अधिकारी सरकार की छवि बिगाड़ रहे हैं। गरीबों को बेघर करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के उपस्थित न होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।


मुख्य सचिव को फोन, नए घर बनवाने के निर्देश

केंद्रीय मंत्री ने घटनास्थल से ही मुख्य सचिव को फोन लगाकर पीड़ितों के लिए तत्काल नए मकान बनवाने तथा जब तक स्थायी व्यवस्था न हो, तब तक उनके रहने व खाने-पीने के समुचित प्रबंध करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष पूरा मामला उठाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि कोसमी गांव शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और उनके पूर्व विधानसभा क्षेत्र बुधनी के अंतर्गत आता है। बताया गया कि करीब एक वर्ष पूर्व भी उन्होंने प्रशासन को आदिवासियों के घर न गिराने के सख्त निर्देश दिए थे, जिसके बाद तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को हटाया भी गया था। इसके बावजूद रविवार को बरेला समुदाय के इन परिवारों पर यह कार्रवाई कर दी गई, जिससे उनके सामने आजीविका और छत का संकट खड़ा हो गया है।


वन विकास निगम और प्रशासन ने साधी चुप्पी

इस पूरी कार्रवाई को लेकर जब वन विकास निगम के अधिकारियों से संपर्क करने और उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से भी इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।


विपक्ष का हमला: ‘सत्ता की खींचतान में उजड़ रहे गरीब’

इस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि- शिवराज सिंह चौहान के पूर्व निर्देशों के बावजूद मोहन यादव सरकार द्वारा की गई यह कार्रवाई भाजपा के वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच के टकराव को दर्शाती है। आपसी वर्चस्व की लड़ाई की कीमत गरीब आदिवासी चुका रहे हैं। कांग्रेस आदिवासियों के हक की लड़ाई सड़क पर लड़ेगी। मोहन सरकार को इसका जवाब देना होगा।


वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मोहन-मामा की आपसी खींचतान में गरीब आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं और उनकी फसलें नष्ट की जा रही हैं। आदिवासियों का क्या कसूर है जो उन्हें सत्ता संघर्ष की सजा भुगतनी पड़ रही है? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी जवाब दें कि प्रभावित परिवारों को न्याय और सुरक्षा कब मिलेगी?