छतरपुर, शिवम सोनी। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हरपालपुर स्थित अनुसूचित जाति बालक छात्रावास में व्यवस्थाओं की बदहाली और दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरतने पर जिला प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। कलेक्टर ने छात्रावास अधीक्षक इंद्रपाल अहिरवार को शासकीय कार्यों में घोर उदासीनता, अव्यवस्था और अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन को लंबे समय से छात्रों द्वारा भोजन की खराब गुणवत्ता, परिसर में पसरी गंदगी और अधीक्षक की लगातार गैर-मौजूदगी को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।
शिकायतों की वस्तुस्थिति जांचने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम ने छात्रावास का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान छात्रों के आरोप सही पाए गए और व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। जांच में सामने आया कि शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन नहीं दिया जा रहा था। पूरे परिसर और कमरों में स्वच्छता का भारी अभाव था, जिससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई थी। इसके अलावा अधीक्षक अपने निर्धारित दायित्वों से नदारद मिले और छात्रावास के रिकॉर्ड संधारण में भी गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं।
निरीक्षण दल द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत गंभीर कदाचरण माना। अधीक्षक इंद्रपाल अहिरवार को शासकीय दायित्वों के निर्वहन में विफलता और लापरवाही के आधार पर तुरंत सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड कार्यालय नियत किया गया है, जहां उन्हें नियमित उपस्थिति देनी होगी। साथ ही उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय रहेगा।
कलेक्टर की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से जिले भर के विभागीय अमले और छात्रावास प्रबंधकों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने कड़े शब्दों में संदेश दिया है कि शासकीय छात्रावासों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण खान-पान से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि छात्रों के कल्याण में कोताही बरतने वाले लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार की कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।












