भोपाल। भोपाल के आवासीय (रहवासी) क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने शनिवार को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की। टीम जब अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर मार्केट और रोहित नगर क्षेत्र में 19 चिन्हित प्रतिष्ठानों को बंद कराने पहुंची, तो प्रशासन की सख्ती को देखते हुए 65 कारोबारियों ने खुद ही अपनी दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दीं। कई दुकानों के शटर पर बोर्ड और बैनर टंगे दिखे, जिन पर लिखा था: ‘भोपाल नगर निगम के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।’


1018 प्रतिष्ठानों को नोटिस; अस्पताल, मेडिकल और बैंक को छूट

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है और आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी: नगर निगम ने स्वतः दुकान बंद करने वाले व्यापारियों से लिखित पंचनामा भरवाया है। कारोबारियों ने लिखित आश्वासन दिया है कि बिना वैध अनुमति के वे दोबारा कमर्शियल गतिविधि शुरू नहीं करेंगे। जनसुविधा और आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों, मेडिकल स्टोर्स और बैंकों को फिलहाल इस कार्रवाई से मुक्त रखा गया है। नगर निगम अब तक कुल 1018 रहवासी परिसरों को नोटिस जारी कर चुका है। इनमें अरेरा कॉलोनी (E-1 से E-5) के 169 और E-6 से रोहित नगर तक के 260 प्रतिष्ठान शामिल हैं।


कार्रवाई के दायरे में आए प्रमुख प्रतिष्ठान

शनिवार को हुई कार्रवाई के दौरान 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी और रोहित नगर रोड के कई नामी ब्रांड्स और दुकानें बंद हुईं: ब्लूस्टोन ज्वेलर्स, पर्पल, यूनाइटेड किड्स, लश क्रॉकरी, इंडियन सिल्क हाउस एजेंसी, नायका ऑन ट्रेंड, हनी रेंटल स्टूडियो, केंटबिल इटली, लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स आदि। अमाडो, द केक दरबार, डी डेकोर, अर्बन टोफा, चाय लीला, ड्रायफ्रूट हाउस, होटल राजमहल, वेजीस, स्टील वुड डिजाइन डेकोर, मीराज, गणेश ओम फास्टफूड आदि।


क्यों हो रही है इतनी सख्त कार्रवाई?

नगर निगम के उपायुक्त हर्षित गुप्ता ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से लगातार नोटिस दिए जा रहे थे। नगर निगम को इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) और स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है। इसके लिए फोटो, वीडियो और पंचनामे के तौर पर पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।


बरखेड़ी मामले में हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

इधर, जहांगीराबाद के बरखेड़ी रोड स्थित एक आवासीय मकान में चल रही ऑटो पार्ट्स शॉप के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नगर निगम अपने स्पीकिंग ऑर्डर के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि रविवार को भी आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा।