मुंबई। महाराष्ट्र के विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव 2026 के नतीजों में महायुति गठबंधन को दो सीटें मिलने के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के नेताओं को संयम बरतने और कम बोलने की नसीहत दी है। एकनाथ शिंदे ने साफ निर्देश दिया है कि शिवसेना और भाजपा के नेता सार्वजनिक रूप से आपस में बयानबाजी न करें, ताकि गठबंधन की एकजुटता पर असर न पड़े। उन्होंने कहा, "दोस्ती में कुश्ती नहीं होनी चाहिए।"
नतीजे आते ही महायुति में दरार की खबरें तेज हो गई थीं। भाजपा ने खुलेआम आरोप लगाया था कि पुणे और नागपुर में शिवसेना से उचित सहयोग और समर्थन नहीं मिला, जिसकी वजह से गठबंधन को झटका लगा। भाजपा के आरोपों का शिवसेना की तरफ से जवाब भी दिया गया था, लेकिन अब एकनाथ शिंदे ने अपने विधायकों और मंत्रियों को हिदायत दी है कि इस मुद्दे पर अब आगे कुछ न बोलें।
गुरुवार रात हुई एक अहम बैठक के बाद एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के नेताओं और पदाधिकारियों को निर्देश दिए। एकनाथ शिंदे ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद महायुति में पैदा हुए विवाद को आगे न बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों का महायुति के तौर पर आत्ममंथन किया जाना चाहिए। चुनाव के दौरान जो गलतियां हुई हैं, उन्हें दोबारा नहीं दोहराया जाए। इसके साथ ही ध्यान रखा जाए कि गठबंधन में किसी तरह की दरार न आए और हमारे आपसी विवादों का फायदा विरोधियों को न मिले।
एकनाथ शिंदे ने यह भी कहा कि हर सीट पर हुई हार की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि महायुति के तौर पर काम करते समय कहां गलतियां हुईं और क्या कमियां रह गईं।
एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि महायुति की समन्वय समिति और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
फिलहाल पार्टी के प्रवक्ताओं और पदाधिकारियों को मीडिया से बातचीत के दौरान सहयोगी दलों की आलोचना नहीं करने की हिदायत दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी नेता आपसी मतभेद और बयानबाजी से बचें और एकजुट होकर फिर से काम में जुट जाएं।

















