नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच इकाई ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की भारत में 2,032.81 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां जब्त की हैं।जांच एजेंसी की ओर से बुधवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में आरपीएल के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है। इन संपत्तियों का मूल्य कंपनी द्वारा भारत के बाहर रखी गई उस विदेशी मुद्रा के बराबर है, जिसे फेमा की धारा 4 का उल्लंघन करते हुए विदेश में रखा गया था।

बयान में कहा गया कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली जानकारी के आधार पर जांच शुरू की गई थी। यह जानकारी आरपीएल की लेखा पुस्तकों में 2,101.46 करोड़ रुपये की राशि को बट्टे खाते में डालने से संबंधित थी। यह राशि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थी।

फेमा के तहत इस साल 6 से 8 मार्च के बीच तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान आपत्तिजनक साक्ष्य जब्त किए गए और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए।

जांच में सामने आया कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड, जिसका बाद में आरपीएल में विलय हो गया, ने 2006 में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के जरिए 30 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ डॉलर का निवेश उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की सहायक कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) पीटीई लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में किया गया था।

आरएनआरएल-एस ने यह राशि जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा कराई थी। इस जमा राशि का इस्तेमाल ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए ऋण के लिए गारंटी के तौर पर किया गया था।

जांच में पाया गया कि इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा ऐसे लोगों के माध्यम से किया जाता था, जो समूह के निर्देशों के अनुसार काम करते थे।

आगे की जांच में पता चला कि ऋण से प्राप्त राशि का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया, जिनमें मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से अस्थायी तौर पर धन को भारत वापस लाना भी शामिल था। इस राशि का इस्तेमाल रिलायंस अनिल अंबानी समूह के लाभ के लिए किया गया और धन का एक हिस्सा भारत के बाहर रखा गया।

डॉयचे बैंक द्वारा दिए गए ऋण को बीवीआई कंपनियां चुकाने में विफल रहीं। मामले पर पर्दा डालने के लिए ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनसे यह दिखाया जा सके कि आरएनआरएल-एस और आरपीएल की इंडोनेशिया स्थित सहायक कंपनियों ने वास्तविक कारोबारी उद्देश्यों के लिए इन बीवीआई कंपनियों को अग्रिम राशि दी थी।

जांच के दौरान पाया गया कि इन दस्तावेजों को पिछली तारीख में तैयार किया गया था, ताकि इन लेनदेन को वास्तविक कारोबारी लेनदेन के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। बयान में कहा गया कि मामले में आगे की जांच जारी है।