बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। वारासिवनी थाना क्षेत्र के नांदगांव पंचायत में अविवाहित बेटी से जन्मे नवजात शिशु को सामाजिक लोक-लाज और राज छिपाने की नीयत से उसके ही नाना ने जिंदा गोबर के ढेर में गाड़ दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी नाना ने खुद भी कीटनाशक (जहर) पी लिया, जिसे गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में नवजात का शव बरामद कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ग्रामीणों के संदेह और सरपंच की पहल से खुला राज
घटना की परतें तब खुलना शुरू हुईं जब रात के समय पड़ोसियों को शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी:
टालमटोल जवाब: जब ग्रामीणों ने बच्चे के रोने को लेकर परिजनों से पूछताछ की, तो वे टालमटोल करने लगे। परिवार के असंतोषजनक जवाब से ग्रामीणों का संदेह गहरा गया।
सरपंच और आशा कार्यकर्ता की सतर्कता: गांव के सरपंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैठक बुलाई। बैठक में मौजूद आशा कार्यकर्ता ने पुष्टि की कि परिवार की बेटी कुछ समय से गर्भवती थी। इसके तुरंत बाद सरपंच ने वारासिवनी थाना पुलिस को सूचित किया।
मुंह और गले में बंधा मिला कपड़ा, 10-12 घंटे बाद निकाला गया शव
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला हरकत में आया:
शव की बरामदगी: 31 जुलाई की रात बारिश और अंधेरा होने के कारण पुलिस ने स्थल को सुरक्षित किया और अगले दिन 1 अगस्त को नायब तहसीलदार चंद्रकिशोर ककोडिया, डॉक्टरों और पुलिस की मौजूदगी में गोबर के ढेर से नवजात के शव को बाहर निकाला गया।
हत्या की आशंका: बरामदगी के दौरान नवजात बालक के मुंह और गले में कपड़ा बंधा हुआ पाया गया। आशंका जताई जा रही है कि दफनाने से पहले बच्चे की सांस घोंटने की नीयत से कपड़ा बांधा गया था।
आरोपी नाना की हालत नाजुक, जांच जारी
घटना के बाद मृत नवजात के नाना धारासिंह मड़ावी ने कीटनाशक गटक लिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
वारासिवनी पुलिस के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद दोषियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।




