छतरपुर, संजय अवस्थी। ग्राम पंचायत बगौता में स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन चंदेलकालीन तालाब में शहर की नजदीकी कॉलोनियों और सीवर लाइन का गंदा पानी छोड़े जाने से भारी आक्रोश व्यापत है। तालाब के किनारे स्थित पौराणिक श्री मोहन बिहारी मंदिर एवं रामजानकी मंदिर परिसर में गंदे पानी के प्रवाह से धार्मिक स्थल की पवित्रता प्रभावित हो रही है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी है।


इस संबंध में समस्त बगौता के रहने वाले पवन राजावत, सुंदर रैकवार सहित अन्य लोगों ने छतरपुर कलेक्टर को एक आवेदन पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया है कि तालाब के किनारे स्थित मंदिर धार्मिक आस्था का एक प्रमुख केंद्र हैं, जहां प्रतिवर्ष केवट समाज द्वारा गंगा जल विहार यात्रा का आयोजन भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त, तालाब के किनारे निर्मित सदी पुराने मंदिरों में पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर से सटी चौबे कॉलोनी, सनसिटी कॉलोनी और आसपास के नवीन भवनों तथा सीवर लाइन का बदबूदार पानी जमीन काटकर इस चंदेलकालीन तालाब में मिला दिया गया है। दूषित और बदबूदार पानी गिरने के कारण तालाब में गंभीर जल प्रदूषण फैल गया है, जिससे मछलियां मर रही हैं और आसपास के रहवासियों में महामारी फैलने की आशंका बनी हुई है।


तालाब का संरक्षण पर्यावरण और कृषि की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सागर रोड और देरी रोड क्षेत्र का भू-जल स्तर इसी तालाब पर निर्भर है, साथ ही बगौता गांव का एक बड़ा कृषि क्षेत्र सिंचाई के लिए इसी पानी पर आश्रित है। यदि समय रहते गंदे पानी की निकासी को नहीं रोका गया, तो यह ऐतिहासिक चंदेलकालीन तालाब अपना अस्तित्व खो देगा। गंदे पानी और बदबू के कारण गांव की लगभग 10 से 15 हजार की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही है।


ग्रामवासियों ने कलेक्टर से पुरजोर अपील की है कि तालाब में आ रहे सीवर और कॉलोनियों के गंदे पानी को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा ऐतिहासिक धरोहर एवं धार्मिक स्थल को दूषित करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।