छतरपुर, सोनू विश्वकर्मा। पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था को जोड़ते हुए भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक-10 द्वारा रविवार, 2 अगस्त को वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। अभियान के तहत 24 जैन तीर्थ स्थलों पर एक साथ 24 तीर्थंकर भगवान के 1008 नामों से 1008 पौधे रोपे गए।


क्षेत्रीय संयोजक पंकज जैन ने बताया कि जैन मान्यता के अनुसार 24 तीर्थंकर भगवान के शरीर में 1008 सुलक्षण एवं चिह्न माने गए हैं। इसी भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए जैन समाज द्वारा पहली बार 24 तीर्थंकरों की आराधना के साथ 24 तीर्थ क्षेत्रों में भगवान के 1008 नामों से 1008 पौधे लगाने का संकल्प लिया गया।


इसी क्रम में जैन मिलन छतरपुर की पुरुष एवं महिला इकाई ने डेरा पहाड़ी स्थित श्री महावीर पार्क में आर्यिका श्री अनर्घमति माता जी, आर्यिका श्री विनतमति माता जी, आर्यिका श्री समयमति माता जी एवं आर्यिका श्री साकारमति माता जी के मंगल आशीर्वाद से वृक्षारोपण किया। यहां जैन समाज अध्यक्ष अरुण जैन 'अन्नू', डेरा पहाड़ी के मंत्री इंजीनियर आर.के. जैन, पूर्व उपाध्यक्ष रितेश जैन तथा महिला मिलन अध्यक्ष सविता जैन की उपस्थिति में 24 तीर्थंकरों के नाम पर 24 पौधे लगाए गए।


इस अवसर पर रितेश जैन ने समाजजनों से आह्वान किया कि वे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ सहित अपने जीवन के प्रत्येक विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसका संरक्षण भी करें। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हम सभी का नैतिक एवं धार्मिक दायित्व है।


वृक्षारोपण कार्यक्रम में प्रकाश जैन, मुकेश देवड़िया, मनोज जैन बजाना, अभिषेक छोटू नेता, राजीव जैन अरिहंत, रविंद्र जैन, स्वतंत्र जैन, एडवोकेट संतोष जैन, पार्षद पति दिनेश तिवारी 'मम्मा', विमला जैन, ममता जैन, प्रीति फट्टा, करुणा देवड़िया, स्मिता जैन, शिल्पी जैन और शोभा जैन सहित अनेक समाजजन शामिल हुए। सभी ने लगाए गए पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का संकल्प लिया।


इन तीर्थ स्थलों पर किया गया वृक्षारोपण


अभियान के अंतर्गत श्री जय जय अतिशय क्षेत्र डेरा पहाड़ी छतरपुर, स्वर्णोदय तीर्थ क्षेत्र खजुराहो, कुंडलपुर, बेला जी, दमोह एवं हटा, मुनिसुव्रत तीर्थ बांसा, विराज्ञोदय तीर्थ पथरिया, आदिश्वर तीर्थ नोहटा, पटेरिया जी गढ़ाकोटा, पटनागंज रहली, तीर्थ बीना बारह, मंगलगिरी सागर, तपोवन तीर्थ सागर, पजनारी तीर्थक्षेत्र, नेमीगिरी बंडा, गिरारगिरी जी, नैनागिरी जी, द्रोणगिरी जी, पार्श्वगिरी भगवाँ, चेतनोदय बिलहरी कटनी, ईश्वरवारा, गिरनार जी और सम्मेदशिखर जी सहित निर्धारित तीर्थ स्थलों पर पौधरोपण किया गया।