भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, उच्च शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऐतिहासिक वित्तीय प्रस्तावों एवं नीतिगत निर्णयों को स्वीकृति प्रदान की गई। कैबिनेट बैठक में ग्रामीण रोजगार गारंटी के विस्तार, विश्वविद्यालय पुनर्गठन, प्रमुख 4-लेन राजमार्गों के निर्माण, स्वास्थ्य संधारण और किसानों से मूंग खरीद सीमा बढ़ाने जैसे कई युगांतरकारी निर्णय लिए गए।

ग्रामीण विकास और आजीविका सुरक्षा को गति देने के लिए कैबिनेट ने "विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी जी राम जी योजना" को 1 जुलाई 2026 से लागू करने का अनुसमर्थन किया। इसके तहत 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसमें केंद्र और राज्य का अंशदान 60:40 के अनुपात में रहेगा। इस नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रति वित्तीय वर्ष 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। योजना के तहत जीआईएस और पीएम गति शक्ति के माध्यम से 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार की जाएगी, जिसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और जिलों में लोकपाल की नियुक्ति कर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का पुनर्गठन कर तीन नए स्वतंत्र विश्वविद्यालय स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत भोपाल में 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' (भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग), उज्जैन में 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' (उज्जैन व इंदौर संभाग) और जबलपुर में 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' (जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग) की स्थापना की जाएगी। इन तीनों संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए पृथक अधिनियम लाए जाएंगे और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय साधिकार समिति भी गठित होगी।

प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और 'सांची' ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई। इसके जरिए अगले 5 वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 26 हजार गांवों तक करने और दुग्ध संकलन क्षमता को 12 लाख किग्रा से बढ़ाकर 52 लाख किग्रा प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाया जाएगा।

सड़क अधोसंरचना को मजबूती देने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास के 35.61 किमी लंबे 4-लेन निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। रातापानी टाइगर रिजर्व, बड़े तालाब के कैचमेंट और समसगढ़ शिव मंदिर के संरक्षण को देखते हुए इसके अलाइनमेंट में बदलाव किया गया है, जिससे इंदौर जाने वाले वाहनों की दूरी 21 किमी घटेगी। वहीं, बीना रिफाइनरी और औद्योगिक क्षेत्र को गति देने के लिए 67.116 किमी लंबे मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के 4-लेन निर्माण हेतु 3 हजार 272 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

किसानों के हित में फैसला लेते हुए कैबिनेट ने रबी विपणन वर्ष में प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन की सीमा को कुल उत्पादन के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का अनुसमर्थन किया। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अस्पतालों के चिकित्सा उपकरणों के रख-रखाव के लिए 488 करोड़ रुपये तथा मॉड्यूलर ओटी और परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 916 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इसके अलावा नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी में प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय और आयुष विभागों में नए पदों के सृजन को भी हरी झंडी दी गई।