नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की हालिया टिप्पणी को लेकर उठे सवालों के बीच सूत्रों ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि उनका बयान सीमा पर नियमित परिचालन तैयारियों और बलों की तैनाती के संदर्भ में था। इसका किसी विशेष घटना से संबंध नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, चीन के साथ भारत की सीमा की सुरक्षा करने वाली आईटीबीपी सरकार की नीतियों, विभिन्न परिस्थितियों में जारी निर्देशों और स्थापित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुरूप काम करती है। इस मामले पर बल की ओर से जल्द ही आधिकारिक बयान भी जारी किया जा सकता है।

दरअसल, आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को कहा था कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है और स्थिति अभी भी जारी है। कपूर ने राजस्थान के अलवर स्थित आईटीबीपी के एक बेस पर बल के जवानों को संबोधित करते हुए कहा था, "पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर आमने-सामने होने की स्थिति पैदा हुई और यह अभी भी जारी है।"

इसी महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले कपूर ने बल की नई लड़ाकू इकाई 'शौर्य कमांडो' के गठन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों के साथ जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान इन कमांडो ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि शौर्य कमांडो को प्रत्येक सीमा बटालियन में तैनात किया जाएगा। इससे बल की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और उसे एक अलग पहचान मिलेगी।

गौरतलब है कि वर्ष 1962 में स्थापित आईटीबीपी भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सुरक्षा करती है। हिमालयी क्षेत्र में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अत्यधिक ठंड के बीच सीमा की निगरानी करना इस बल की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। कपूर की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और चीन पिछले कई वर्षों से सीमा पर जारी सैन्य तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

पिछले महीने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने एनडीटीवी डिफेंस समिट में कहा था कि सीमा पर स्थिति स्थिर है और चिंता की कोई वजह नहीं है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले सप्ताह कहा था कि दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आगाह किया था कि सीमा पर किसी भी तरह की बाधा का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।

भारत और चीन अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को सुलझाने के लिए बनी सहमति के बाद संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में यह गतिरोध चार साल से अधिक समय तक चला था, जिससे दोनों देशों के रिश्तों पर गंभीर असर पड़ा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत का दौरा किया था। सात साल बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की थी, जिसमें दोनों नेताओं ने संबंधों की समीक्षा की और सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।