छतरपुर,सुबोध त्रिपाठी। विजयादशमी यानी दशहरा पर्व पूरे देश के साथ-साथ छतरपुर जिले में भी हर्षोल्लास और पारंपरिक आस्था के साथ मनाया गया। जहाँ एक ओर बड़े-बड़े मैदानों में विशालकाय रावण के पुतलों का दहन किया गया, वहीं दूसरी ओर छतरपुर शहर की चेतगिरी कॉलोनी में त्योहार का एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक नज़ारा देखने को मिला।
यहाँ रहने वाले छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी लगन, मेहनत और रचनात्मकता का परिचय देते हुए खुद ही रावण का पुतला तैयार किया और पूरी परंपरा व उत्साह के साथ उसका दहन कर विजयादशमी का पर्व मनाया।
बच्चों ने खुद की मेहनत से दिया कला का परिचय
चेतगिरी कॉलोनी के नन्हे-मुन्नों ने इस बार बाज़ार से पुतला लाने या केवल बड़ों का दहन देखने के बजाय खुद अपनी कला से रावण का पुतला बनाने का फैसला किया। बच्चों ने कई दिनों से कागज़, बाँस और रंगों का उपयोग कर अपनी मेहनत से एक आकर्षक पुतला तैयार किया। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर त्योहार को लेकर खासा उत्साह और उमंग देखने को मिला।
हर्षोल्लास के साथ किया दहन, गूंजे जयकारे
दशहरे की शाम को कॉलोनी के सभी बच्चे एक साथ एकत्र हुए और पूरे रीति-रिवाज के साथ रावण के पुतले का दहन किया। पुतला दहन होते ही बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और पूरा परिसर "जय श्री राम" के जयकारों व आतिशबाजी से गूंज उठा। बच्चों के इस अभिनव प्रयास ने न केवल कॉलोनीवासियों का दिल जीत लिया, बल्कि त्योहार की खुशियों को भी कई गुना बढ़ा दिया।
इन बच्चों की रही सराहनीय उपस्थिति
इस बाल आयोजन और रावण दहन के कार्यक्रम में मुख्य रूप से हिमांशी गेमलानी, खुशी, एंजल, शिव, शिवांश, अमय, रंश मिश्रा, समर्थ और लाडो सहित कॉलोनी के अन्य छोटे-छोटे बच्चे मौजूद रहे। इन सभी बच्चों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया और बड़ों से भी खूब शाबाशी बटोरी।
संस्कृति और परंपरा को समझने की बेहतरीन पहल
दशहरा का पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। नन्हें बच्चों द्वारा किए गए इस आयोजन से यह साफ जाहिर होता है कि वे हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और पर्वों के नैतिक मूल्यों को कितनी गहराई से समझ रहे हैं। बच्चों के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि खुशियाँ मनाने के लिए बड़े आयोजनों की नहीं, बल्कि मन में सच्ची लगन और उत्साह की आवश्यकता होती है।
















