छतरपुर। विजयादशमी (दशहरे) के उपलक्ष्य में क्षेत्रीय भाजपा विधायक ललिता यादव स्वयं शहरवासियों को पान खिलाने और दशहरे की बधाई देने बाजार में निकलीं। दशहरे पर पान खाने और खिलाने की प्राचीन बुंदेली परंपरा का निर्वहन करते हुए विधायक ने नगर के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने जिले के पान उत्पादक चौरसिया समाज की वर्षों पुरानी पीड़ा को मंच देते हुए 'पान विकास निगम' के गठन की पुरजोर वकालत की। विधायक ने कहा कि पान की पारंपरिक खेती से जुड़े चौरसिया समाज के आर्थिक उत्थान और पान उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा करेंगी, ताकि प्रदेश में जल्द से जल्द पान विकास निगम अस्तित्व में आ सके।
शहरवासियों को पान खिलाते हुए विधायक ललिता यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में विभिन्न व्यवसायों, शिल्पों और वर्गों के कल्याण के लिए अलग-अलग विकास निगम और बोर्ड कार्यरत हैं। इसी तर्ज पर जिले और प्रदेश में पान की खेती करने वाले चौरसिया समाज को भी शासकीय संरक्षण और योजनाओं का सीधा लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पान की खेती बेहद संवेदनशील, अत्यधिक श्रमसाध्य और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होने वाली खेती है। ऐसे में 'पान विकास निगम' का गठन होने से किसानों को अनुदान, बीमा, आधुनिक शेड नेट और बाजार तक सीधी पहुंच का अधिकार मिल सकेगा।
सीएम से चर्चा कर जल्द कराएंगे निगम का गठन
चौरसिया समाज की मांग को पूरी मजबूती से शासन स्तर पर उठाने का संकल्प दोहराते हुए विधायक ललिता यादव ने आश्वस्त किया कि वे इस विषय को लेकर बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि वे भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री से प्रत्यक्ष भेंट करेंगी और छतरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड के पान उत्पादक किसानों की स्थिति से अवगत कराएंगी। विधायक ने भरोसा दिलाया कि वे शासन स्तर पर नीतिगत निर्णय करवाकर जल्द से जल्द पान विकास निगम के गठन की प्रक्रिया को मूर्त रूप दिलाएंगी, जिससे इस पारंपरिक काम से जुड़ी नई पीढ़ी को भी रोजगार और संबल मिल सके।
आपको बता दें कि बुंदेलखंड अंचल, विशेषकर छतरपुर जिले का गढ़ीमलहरा, महाराजपुर, पनागर आदि अंचलों में पीढ़ियों से बरेजों में पान की खेती की जाती रही है। यहां उत्पादित होने वाले देशी और मघई पान की मिठास, कोमलता और स्वाद की ख्याति कभी देशभर की मंडियों में गूंजती थी। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में लगातार मौसम की मार, भीषण गर्मी, पानी की कमी, लागत में बेतहाशा वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं में मिलने वाली अपर्याप्त राहत के कारण कई किसान इस पुश्तैनी व्यवसाय से विमुख होने लगे हैं। ऐसे कठिन समय में 'पान विकास निगम' के गठन की मांग चौरसिया समाज के अस्तित्व और बुंदेलखंड की इस सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
















