छतरपुर। छतरपुर जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में लचर कार्यप्रणाली, शैक्षणिक गुणवत्ता में गिरावट और जनशिकायतों के प्रति घोर लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर प्रशासन का सख्त हंटर चला है। दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए जहां एक ओर सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का संतोषजनक निराकरण न करने पर जिले के 20 प्राचार्यों और लेखापालों को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है, वहीं दूसरी ओर 'जन विश्वास अभियान' के तहत किए गए औचक निरीक्षण में ललगुवां स्कूल की बदहाल शैक्षणिक व्यवस्था उजागर होने पर राजनगर बीआरसीसी, जनशिक्षक और स्कूल स्टाफ समेत 7 अधिकारियों-कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है। विभाग की इस दोहरी कार्रवाई से पूरे महकमे में भारी हड़कंप मच गया है।


'जन विश्वास अभियान' के अंतर्गत 25 सितंबर को संकुल केंद्र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथपुर के अधीन संचालित शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला ललगुवां का उच्चस्तरीय प्रशासनिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्कूल की जमीनी हकीकत देखकर जांच अधिकारी दंग रह गए। विद्यालय में प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर बेहद दयनीय और चिंताजनक पाया गया। इसके साथ ही शासन की महत्वाकांक्षी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता योजना के अनुरूप कोई गतिविधियां संचालित नहीं हो रही थीं। स्कूल भवन और परिसर का समुचित रख-रखाव न होने जैसी गंभीर कमियां भी उजागर हुईं।


शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक दायित्वों में घोर लापरवाही सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस पाने वालों में राजनगर बीआरसीसी अतुल चंद्रवती, जनशिक्षक अक्षय मिश्रा, ईपीईएस ललगुवां के प्रभारी प्रधानाध्यापक कृष्णपाल सिंह, शिक्षक सुधा गुप्ता तथा प्राथमिक शिक्षक शिवानी जायसवाल, कल्पना गुप्ता और रागिनी गुप्ता शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि समयावधि में संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में सभी संबंधितों के खिलाफ विभागीय सेवा नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


वहीं दूसरे बड़े मामले में, शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली 'सीएम हेल्पलाइन' पोर्टल पर दर्ज आम नागरिकों की शिकायतों के निराकरण में शिथिलता बरतने पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों पर समय रहते समुचित कदम न उठाने, पीड़ितों को संतुष्टिपरक समाधान उपलब्ध न कराने और कार्य में अनावश्यक देरी करने पर जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के 20 प्राचार्यों और लेखापालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।